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हिमाचल: मंडलायुक्त नगर निगम पार्षदों की अयोग्यता पर करेंगे फैसला, सरकार ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

Thu, 25 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

शिमला, कांगड़ा और मंडी के मंडलायुक्तों को सक्षम प्राधिकारी नामित किया है। ये अधिकारी अब नगर निगम के पार्षदों की अयोग्यता से जुड़े मामलों की सुनवाई और उन पर फैसला करेंगे। 
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हिमाचल प्रदेश सरकार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिमला, कांगड़ा और मंडी के मंडलायुक्तों को सक्षम प्राधिकारी नामित किया है। ये अधिकारी अब नगर निगम के पार्षदों की अयोग्यता से जुड़े मामलों की सुनवाई और उन पर फैसला करेंगे। शहरी विकास विभाग ने इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की। इस कदम का उद्देश्य नगर निगमों में पार्षदों की योग्यता संबंधी विवादों का त्वरित निपटारा करना है। मंडलायुक्त अपने संबंधित क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर आने वाले नगर निगमों के मामलों को देखेंगे। उन्हें पार्षदों की अयोग्यता से संबंधित किसी भी प्रश्न की सुनवाई करने का अधिकार होगा।

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सरकार ने अधिनियम के प्रावधान का दिया हवाला

वे इन मामलों की जांच करेंगे और उन पर अंतिम निर्णय देंगे। इस नई व्यवस्था से स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। यह निर्णय राज्य सरकार के सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधान सचिव शहरी विकास के आदेश पर यह अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिकार हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत दिया गया है। विशेष रूप से, अधिनियम की धारा 8 की उप-धारा (5) इन शक्तियों को प्रदान करती है। मंडलायुक्तों को धारा 8 की उप-धारा (1) और (2) में वर्णित अयोग्यताओं पर विचार करना होगा। इन उप-धाराओं में पार्षदों के लिए विभिन्न अयोग्यता मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
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