वे इन मामलों की जांच करेंगे और उन पर अंतिम निर्णय देंगे। इस नई व्यवस्था से स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। यह निर्णय राज्य सरकार के सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधान सचिव शहरी विकास के आदेश पर यह अधिसूचना जारी की गई है। यह अधिकार हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत दिया गया है। विशेष रूप से, अधिनियम की धारा 8 की उप-धारा (5) इन शक्तियों को प्रदान करती है। मंडलायुक्तों को धारा 8 की उप-धारा (1) और (2) में वर्णित अयोग्यताओं पर विचार करना होगा। इन उप-धाराओं में पार्षदों के लिए विभिन्न अयोग्यता मानदंड निर्धारित किए गए हैं।