ऐसे में ओपीएस का लाभ लेने के लिए अधिकारियों-कर्मियों सहित इस योजना के पात्र फैमिली पेंशन वालों ने 881 करोड़ रुपये जमा करवाए। ये वो रकम है, जो एनपीएस शेयर के तहत उन्हें मिलनी थी। मंगलवार को भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने इस बाबत सवाल लगाया था। मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब देते हुए कहा कि ओपीएस के तहत रिटायर सभी अफसर-कर्मी जिनमें एनपीएस से आए लोग भी शामिल हैं, उन सभी को मेजर हेड 2071-पेंशन एंड अदर बेनिफिट्स में रिटायरमेंट लाभ दिए जाते हैं। ऐसे में एनपीएस से ओपीएस में शामिल होने के बाद रिटायर हुए लोगों पर खर्च की गई राशि का विवरण उपलब्ध नहीं है।
डायलिसिस पर चल रहे पेंशनरों के 10 करोड़ रुपये के मेडिकल बिल लंबित
मुख्यमंत्री ने बताया कि घातक रोग कैंसर एवं किडनी में खराबी के कारण डायलिसिस पर चल रहे पेंशनरों के 10 करोड़ रुपये से अधिक के मेडिकल बिल लंबित हैं। विगत तीन साल की अवधि में 31 जनवरी 2026 तक कैंसर पीड़ित व डायलिसिस पर चल रहे पेंशनरों के 10.26 करोड़ रुपये से अधिक के मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाना बाकी है। इनमें रिटायर होकर पेंशन हासिल करने वालों से लेकर फैमिली पेंशन वाले लोग भी शामिल हैं। भाजपा विधायक इंद्र दत्त लखनपाल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 में पेंशनरों के 3.45 करोड़ रुपये से अधिक के मेडिकल बिल लंबित हैं। इसी अवधि में फैमिली पेंशन वालों के 1.39 करोड़ रुपये से अधिक के मेडिकल बिलों का भुगतान होना बाकी है। वर्ष 2024-25 में पेंशनरों के 3.99 करोड़ रुपये व फैमिली पेंशन वालों के 1.06 करोड़ रुपये से अधिक के बिल लंबित हैं। वर्ष 2025-26 में जनवरी के आखिर तक लंबित बिलों का आंकड़ा क्रमश: 8.65 करोड़ व 1.58 करोड़ रुपये से अधिक है। तीन साल की अवधि में ये रकम 10 करोड़, 26 लाख, 53 हजार रुपए बनती है।