रोटेशनल एथेरेक्टॉमी सिस्टम को आम बोलचाल में डायमंड ड्रिल कहा जाता है, क्योंकि इसकी कार्यप्रणाली किसी बारीक ड्रिल मशीन जैसी है। इस मशीन के आगे एक छोटा बर लगा होता है, जिस पर असली हीरे के सूक्ष्म कणों की कोटिंग होती है। हीरा दुनिया का सबसे कठोर पदार्थ है, इसलिए यह धमनी के अंदर मौजूद पत्थर जैसे सख्त कैल्शियम को आसानी से घिस सकता है। यह ड्रिल धमनियों के अंदर 1.5 लाख से 1.8 लाख प्रति मिनट चक्कर की तूफानी गति से घूमती है और कठोर ब्लॉकेज को बारीक पाउडर की तरह पीस देती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल कठोर कैल्शियम को काटती है, जबकि दिल की नसों की कोमल दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
यह पूरी तरह से सुई के जरिये होने वाला इलाज है, जिसमें मरीज को बड़ा कट नहीं लगता। अब तक जिन मामलों में ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था, वहां अब महज एक छोटे छेद के जरिये इलाज संभव होगा। अब तक इस विशिष्ट तकनीक के लिए मरीजों को चंडीगढ़ या दिल्ली भागना पड़ता था। अब प्रदेश के मरीजों को बाहरी राज्यों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।