संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा (सीबीएसई) बोर्ड की 12वीं कक्षा की फिजिक्स की परीक्षा शुक्रवार को विभिन्न केंद्रों पर हुई। इस बार पेपर नए पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया था, जिसमें रटने की बजाय कॉन्सेप्ट और एप्लिकेशन आधारित प्रश्नों को प्राथमिकता दी गई।
सेक्शन-ए में ऑब्जेक्टिव और केस स्टडी आधारित प्रश्न अपेक्षाकृत सरल रहे, जिससे छात्रों ने शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की। हालांकि सेक्शन-बी और सी में छोटे और लंबे उत्तर वाले प्रश्नों ने विद्यार्थियों की विषय पर पकड़ को परखा। सबसे अधिक चर्चा सेक्शन-डी के न्यूमेरिकल प्रश्नों को लेकर रही।
प्रश्नों की संख्या अधिक होने और विस्तृत गणना की आवश्यकता के कारण विद्यार्थियों को समय प्रबंधन में दिक्कत हुई। कई छात्रों ने बताया कि पेपर पूरा करने के लिए अंत तक संघर्ष करना पड़ा और रिवीजन के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। इतना ही नहीं कई सवालों में सूत्रों का सही चयन और इकाइयों का सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी था।
कुछ विद्यार्थियों ने कहा कि तीन घंटे का समय प्रबंधन अहम रहा, क्योंकि विस्तृत हल लिखने वाले प्रश्नों में अपेक्षा से अधिक समय लगा। कुल मिलाकर नए पैटर्न के अनुरूप प्रश्नपत्र में वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का संतुलित समावेश रहा।
एनसीईआरटी आधारित लेकिन पेपर रहा लंबा
शहर के एक निजी स्कूल के फिजिक्स प्रवक्ता राजीव ने बताया कि प्रश्नपत्र पूरी तरह एनसीईआरटी आधारित था। नियमित अभ्यास करने वाले विद्यार्थियों के लिए पेपर कठिन नहीं था, लेकिन लंबाई के कारण कई छात्र तीन-चार प्रश्न नहीं कर पाए। उनके अनुसार प्रश्नों को समझने में समय लगा, जिससे हल करने की गति प्रभावित हुई। नेशनल पब्लिक स्कूल के शिक्षक रोहित ने बताया कि बोर्ड ने इस बार स्पष्ट संदेश दिया है कि सफलता समझ पर निर्भर है, न कि रटने पर। केस स्टडी आधारित प्रश्नों ने विद्यार्थियों की विश्लेषण क्षमता को परखा। पेपर संतुलित था, लेकिन कुछ प्रश्न ऐसे थे जिनमें समाधान तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा।
अधिक कैलकुलेशन करना पड़ा
छात्रा अराध्या ने बताया कि न्यूमेरिकल प्रश्नों में अधिक कैलकुलेशन करना पड़ा, लेकिन उसने सभी प्रश्न हल कर लिए। वहीं छात्र राहुल ने कहा कि पेपर लंबा था और अंतिम 15 मिनट में रिवीजन के लिए बहुत कम समय मिला। छात्र सतीश के अनुसार करंट इलेक्ट्रिसिटी और मॉडर्न फिजिक्स से अपेक्षित प्रश्न आए, पर कई सवाल घुमाकर पूछे गए, जिससे सोचने में समय लगा। कुल मिलाकर फिजिक्स का पेपर कठिन तो नहीं रहा, लेकिन लंबाई और गणनात्मक प्रश्नों की अधिकता ने विद्यार्थियों की परीक्षा जरूर ले ली। अब छात्रों को परिणाम का इंतजार है, जहां उनकी मेहनत का असली मूल्यांकन होगा।