10-सुपवा में आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग डिपार्टमेंट की पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन पर भू-स्थान
- पांच दिवसीय कार्यशाला में सीखीं सतत विकास की तकनीकें
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में अब तकनीक के सहारे भविष्य के शहरों का डिजिटल खाका तैयार किया जाएगा। इसी दिशा में दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय वास्तुकला विभाग के छात्रों को पांच दिवसीय विशेष कार्यशाला में आधुनिक शहरी विकास की तकनीकों से प्रशिक्षित किया गया।
कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कहा कि पाठ्यक्रम में उन्नत तकनीकी उपकरणों को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को पारंपरिक ड्राफ्टिंग से आगे बढ़ाकर स्थानिक डेटा विशेषज्ञ बनाना है, ताकि वे एक भी ईंट रखने से पहले टिकाऊ और सुरक्षित शहरों की योजना बना सकें।
विभाग के अजय बाहु जोशी ने बताया कि छात्र अब पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सटीक योजना तैयार करने में सक्षम होंगे। डीन एकेडमिक अफेयर्स डॉ. अजय कौशिक ने कहा कि सुपवा का लक्ष्य तकनीकी रूप से दक्ष योजनाकार तैयार करना है, जो हर निर्णय को ठोस स्थानिक साक्ष्यों के आधार पर लें।
भू-स्थानिक तकनीक से समझेंगे शहरों की बढ़त
17 फरवरी से शुरू हुई कार्यशाला में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार ने छात्रों को जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, डेटा विश्लेषण और डिजिटल मैपिंग की बारीकियां सिखाईं। विद्यार्थियों ने सैटेलाइट चित्रों के माध्यम से शहरों के विस्तार का अध्ययन, डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार करना, जल प्रवाह का विश्लेषण और सुरक्षित भवन स्थलों का चयन करना सीखा। इसके प्रयोग से संसाधनों का कुशल प्रबंधन संभव होता है जिससे पानी, बिजली और यातायात की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।