संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने स्नातक प्रथम वर्ष के दाखिले के लिए दूसरी मेरिट सूची जारी की है। इसके बाद महाविद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया तेज हो गई है। यह सूची उन विद्यार्थियों के लिए है जिनका नाम पहली सूची में नहीं आया था। प्रवेश शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 7 अगस्त शाम 5 बजे तक है।
शहर के राजकीय कन्या महाविद्यालय, केएलपी कॉलेज और आरडीएस पब्लिक गर्ल्स कॉलेज में दाखिला प्रक्रिया में तेजी आई है। कुछ पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई है। हालांकि, कुछ पाठ्यक्रमों में सीटों की तुलना में आवेदन कम प्राप्त हुए हैं। बुधवार को विद्यार्थी और अभिभावक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने पहुंचे। कॉलेज प्रशासन ने दस्तावेज की जांच और शुल्क जमा किया।
उच्चतर शिक्षा निदेशालय 9 अगस्त को दोबारा ऑनलाइन पोर्टल खोलेगा। यह उन विद्यार्थियों के लिए है जिनका परिणाम देरी से आया या जो पहले आवेदन नहीं कर पाए थे। ऐसे विद्यार्थी 10 से 16 अगस्त तक 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ दाखिला ले सकेंगे। इस नए अवसर से समय पर आवेदन न कर पाने वाले विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। अन्य संस्थानों में प्रवेश न पाने वाले भी दाखिले का प्रयास कर सकेंगे।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। स्नातक अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम में रिअपीयर आने से परेशानी बढ़ी है। रिअपीयर वाले विद्यार्थी पीजी पाठ्यक्रमों में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। स्नातक की तरह पीजी प्रथम वर्ष के लिए 7 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक अधिकांश कॉलेजों में निर्धारित सीटों की तुलना में आवेदन संख्या कम है।
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राजकीय कन्या महाविद्यालय में पीजी आवेदन
सेक्टर-18 स्थित राजकीय कन्या महाविद्यालय में एमएससी भूगोल की 40 सीटों के लिए 56 आवेदन आए हैं। एमएससी वनस्पति विज्ञान की 40 सीटों पर 40 छात्राओं ने आवेदन किया है। एमकॉम की 60 सीटों पर भी 60 आवेदन प्राप्त हुए हैं। एमए योगासन की 40 सीटों के लिए 26 आवेदन मिले हैं। एमए इतिहास की 40 सीटों के लिए 64 और एमए अंग्रेजी की 40 सीटों के लिए 30 छात्राओं ने आवेदन किया है।
आरडीएस पब्लिक गर्ल्स कॉलेज में एमए हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और एमकॉम में 40-40 सीटें निर्धारित हैं। इनमें क्रमशः 14, 18, 20 और 19 छात्राओं के आवेदन आए हैं। केएलपी कॉलेज में पीजी पाठ्यक्रमों के लिए करीब 50 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन कॉलेजों में भी कई पीजी पाठ्यक्रमों में सीटों के मुकाबले आवेदन कम हैं। यह स्थिति विद्यार्थियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।