सनौली। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा गांव के प्रांगण में कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को सरसों की उन्नत उत्पादन तकनीक की जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य सरसों की मुख्य बीमारियों व कीट प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा करना रहा, इसमें जिले के लगभग 65 किसानों ने हिस्सा लिया।
कृषि विज्ञान केंद्र के संयोजक डॉ. सतपाल सिंह ने बताया कि इस समय सरसों की फसल में तना गलन बीमारी का प्रकोप देखा गया है, इसके लिए किसान भाइयों को सलाह दी कि वे बाविस्टिन कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत का एक ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करें। कहा कि सरसों में चेपे के प्रकोप भी इस मौसम में बढ़ जाता है। इसके नियंत्रण के लिए किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वह अपनी सरसों की फसल में 250 से 400 मिलीलीटर मिथाइल डिमेटोन 25 इसी या रोगोर 30 इसी को 250 से 400 लीटर पानी प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।