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पंचकूला जिला परिषद में घोटाला: फर्जी फर्मों से निकाला सरकारी पैसा, बिना काम भुगतान, 1.88 करोड़ की गड़बड़ी

Fri, 03 Apr 2026 08:11 AM IST
Ankesh Kumar दीपक शाही, पंचकूला

सार

हरियाणा आईडीएफसी बैंक स्कैम के बाद पंचकूला में भी बड़ा घोटाला हुआ है। जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपये उन फर्मों को दिए गए जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था। कुछ ट्रांजेक्शन में रुबानी एंटरप्राइजेज के खाते में 20.14 लाख रुपये और एक निजी खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
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घोटाला। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों के विकास के नाम पर पंचकूला जिला परिषद में करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि बिना धरातलीय कार्य किए फर्जी फर्मों के माध्यम से सरकारी धन निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। सेक्टर-7 थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है।

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जांच के दौरान पता चला कि ब्लॉक कोऑर्डिनेटर और कंप्यूटर ऑपरेटरों ने मिलकर फर्जी बिल तैयार किए और सरकारी राशि निकाल ली। जिन शौचालयों के निर्माण का दावा किया गया, वे जमीन पर मौजूद ही नहीं मिले। मुख्य आरोपी के अनुसार करीब 1 करोड़ 88 लाख रुपये की राशि फर्जी बिलों के जरिए निकाली गई, जबकि वास्तविक गड़बड़ी इससे अधिक होने की आशंका है। यह खेल सितंबर 2019 से दिसंबर 2025 तक चलता रहा।

फर्जी फर्मों के जरिए किया गबन
पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से 100 से अधिक पेज की व्हाट्सएप चैट और 29 पेज के दस्तावेज मिले हैं। जांच में सामने आया कि रुबानी एंटरप्राइजेज, न्यू दुर्गा फर्म और बजरंग बली फर्म जैसी फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन उनके खातों में ट्रांसफर किया गया। जाली हस्ताक्षर और फर्जी मुहरों के जरिए बैंक से भुगतान स्वीकृत कराया गया।
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नकद लेन-देन और बंटवारे का खुलासा
आरोपियों ने कबूल किया कि गबन की गई राशि में से करीब 1 करोड़ रुपये विभिन्न आरोपियों और कुछ अधिकारियों के बीच बांटे गए। चार ब्लॉक समन्वयकों को 25-25 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि कुछ रकम अन्य अधिकारियों तक भी पहुंचाई गई। आरोपी ने अपने हिस्से के 5 लाख रुपये मोहाली स्थित एक रिश्तेदार के घर छिपाने की बात भी स्वीकार की।

बैंक ट्रांजेक्शन से खुली पोल
जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपये उन फर्मों को दिए गए जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था। कुछ ट्रांजेक्शन में रुबानी एंटरप्राइजेज के खाते में 20.14 लाख रुपये और एक निजी खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। अन्य संदिग्ध लेन-देन भी सामने आए हैं।

गबन का तरीका
आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए आरटीजीएस भुगतान मंजूर करवाए, पुराने कार्यों के नाम पर नए बिल तैयार किए और बिना काम किए ही भुगतान उठा लिया। पुलिस ने गगनदीप गोयल (कंप्यूटर ऑपरेटर), दिनेश कुमार (स्वच्छ भारत मिशन इंचार्ज) सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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