पंचकूला। सेक्टर 16 अग्रवाल भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक साक्षी गोपाल दास ने मोह और आध्यात्मिक जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मोह को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि उसे शुद्ध कर सही दिशा में मोड़ा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मोह जीव का स्वाभाविक गुण है और कोई भी प्राणी इसके बिना नहीं रह सकता। समस्या मोह में नहीं, बल्कि उसकी दिशा में होती है। जब मनुष्य का मोह भौतिक वस्तुओं शरीर, परिवार, धन, पद और प्रतिष्ठा की ओर होता है तो वह दुख का कारण बनता है। वहीं यदि यही मोह भगवान, भक्ति, सेवा, नाम जप और सत्संग की ओर लग जाए तो वही मुक्ति का मार्ग बन जाता है। गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संदेश है कि मोह को खत्म करने के बजाय उसे भगवान की ओर मोड़ देना चाहिए। जब व्यक्ति का मोह भगवान में लग जाता है तो वही भक्ति का रूप ले लेता है और जीवन को सार्थक बना देता है।
संसार की वस्तुओं में आसक्ति से इच्छा उत्पन्न होती है, इच्छा से क्रोध, क्रोध से मोह और अंततः बुद्धि का नाश हो जाता है। इस पूरी श्रृंखला की शुरुआत गलत स्थान पर लगी आसक्ति से होती है। जब व्यक्ति यह समझ लेता है कि समस्या बाहर नहीं बल्कि उसके भीतर है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन शुरू होता है।
13 अप्रैल को कथा का समापन
प्रवचन के उपरांत हरे कृष्ण महामंत्र की मधुर धुन पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे और सामूहिक कीर्तन में भाग लिया। इसके पश्चात नंद बाबा, विमल टंडन, विकास पंचाल, सुनील कुमार, दीपक महल, वैभव, अनिल भाटिया, कमल खेड़ा, पुनीत खुराना और अमित चौहान सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आरती कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समिति प्रवक्ता केके. भसीन ने बताया कि 13 अप्रैल को कथा के समापन अवसर पर कथा व्यास साक्षी गोपाल दास को हरे कृष्ण प्रचार समिति के पदाधिकारियों के निवास स्थान से विधिवत विदाई दी जाएगी।