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Kurukshetra News: प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में डॉ. विपाशा प्रथम

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कुरुक्षेत्र। आयुष विश्वविद्यालय में पोस्टर का निरीक्षण करते कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान एवं अ
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में पेपर प्रेजेंटेशन और पोस्टर प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने फार्माकोविजिलेंस और आयुष औषधियों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए। पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में द्रव्यगुण विज्ञान विभाग की पीजी स्कॉलर्स डॉ. विपाशा ने प्रथम, रसशास्त्र व भैषज्यकल्पना विभाग की पीजी स्कॉलर्स डॉ. मीनल सिंगल ने द्वितीय और उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की छात्रा डॉ. प्रगति नेगी तृतीय स्थान पर रही।
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पोस्टर प्रतियोगिता में प्रसूति तंत्र व स्त्री रोग विभाग की द्वितीय वर्ष की पीजी स्कालर्स डॉ. प्राजक्ता चौधरी ने पहला, काय चिकित्सा विभाग की पीजी स्कॉलर डॉ. दिव्या सरदाना ने दूसरा और संहिता व सिद्धांत विभाग की प्रथम वर्ष की पीजी स्कॉलर्स डॉ. मंजीता ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल की भूमिका डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर डॉ. रणधीर, डॉ. रविंद्र, डॉ. ममता, डॉ. आशु, डॉ. सुनीति और डॉ. आशीष ने निभाई।
उपलब्धि पर आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने विजेताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि फार्माकोविजिलेंस जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विद्यार्थियों की ओर से किए जा रहे शोध और प्रस्तुतीकरण आयुष चिकित्सा पद्धति को और अधिक वैज्ञानिक, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर आयुर्वेद अध्ययन व अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता समेत अन्य मौजूद रहे।
आयुष सुरक्षा पोर्टल से दवा सुरक्षा की निगरानी : द्रव्यगुण विज्ञान विभाग की पीजी स्कॉलर डॉ. विपाशा “डिजिटल फार्माकोविजिलेंस इन आयुष : ड्रग सेफ्टी मॉनिटरिंग में आयुष सुरक्षा पोर्टल की भूमिका” विषय पर प्रस्तुति देकर प्रथम रहीं।
आयुष सुरक्षा पोर्टल के माध्यम से दवाओं की सुरक्षा की निगरानी और दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग की प्रक्रिया के बारे में बताया। रसशास्त्र व भैषज्य कल्पना विभाग की पीजी स्कॉलर डॉ. मीनल सिंगल ने वैद्य, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट और शोधार्थियों को फार्माकोविजिलेंस की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। हैंड्स-ऑन प्रैक्टिस और वर्कशॉप इत्यादि कराई जानी चाहिए। एडीआर रिपोर्टिंग के लिए मोबाइल एप विकसित करने का सुझाव दिया।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की डॉ. प्रगति नेगी आयुष औषधियों व चिकित्सीय प्रक्रियाओं की सुरक्षा की निगरानी विषय पर प्रस्तुति देकर तीसरा स्थान प्राप्त किया।

कुरुक्षेत्र। आयुष विश्वविद्यालय में पोस्टर का निरीक्षण करते कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान एवं अ

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