माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर की प्रमुख सड़कों को बिजली के खंभों और तारों के जाल से मुक्त करने के उद्देश्य से शुरू किया गया अंडरग्राउंड बिजली लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट अब भी अधूरा पड़ा है। बिजली निगम की ओर से तीन अहम सड़कों पर इस योजना के तहत बिजली लाइनों को भूमिगत करने का कार्य शुरू किया गया था जिसे पिछले साल मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी। अब एक साल बाद भी काम अधर में लटका हुआ है।
परियोजना की धीमी रफ्तार का असर यह है कि शहर में कई स्थानों पर अब भी बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर डिवाइडर पर लगे हुए हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है बल्कि शहर की सूरत-ए-हाल भी पहले जैसी ही बनी हुई है।
बिजली निगम की ओर से मेरठ चौक से महाराणा प्रताप चौक होते हुए मीरा घाटी तक भूमिगत लाइन बिछाने का काम काफी पहले पूरा कर लिया गया था। इसके बावजूद करीब छह महीने से यह लाइन चालू नहीं हो पाई है। नतीजा यह है कि सड़क किनारे लगे पुराने बिजली खंभे और तार अब तक नहीं हटाए जा सके हैं। जब तक नई लाइन से बिजली सप्लाई शुरू नहीं होती तब तक मौजूदा व्यवस्था को हटाना संभव नहीं माना जा रहा।
कुंजपुरा रोड पर और स्थिति खराब
शहर के व्यस्ततम मार्गों में शामिल कुंजपुरा रोड पर यह परियोजना सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रही है। यहां डिवाइडर पर लगे खंभों और ट्रांसफार्मरों को हटाने के लिए भूमिगत केबल बिछाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि कुछ दिन पहले ही इस सड़क पर भूमिगत लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है लेकिन अभी तक काम शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ पाया है। व्यस्त बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां काम में तकनीकी और यातायात संबंधी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
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भूमिगत बिजली लाइनों के ये हैं फायदे
भूमिगत बिजली लाइन व्यवस्था लागू होने से कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे खुले तारों के कारण करंट लगने और शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं का खतरा कम होगा। इसके अलावा आंधी-तूफान, बारिश या पेड़ गिरने से बिजली लाइन टूटने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो सकती है। मौसम या बाहरी कारणों से फॉल्ट कम होने से बिजली आपूर्ति सुचारू रहनने की संभावना रहती है।
वर्जन
काम की गति कुछ समय पहले कुछ कम जरूरी हुई थी। अब पूरी गति के साथ कार्य जारी है। आने वाले कुछ माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - नसीब सिंह, अधीक्षक अभियंता, करनाल