माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शाम की सैर आपको बीमार कर सकती है। सांस रोगियों के लिए अधिक खतरा है। शाम ढलते ही प्रदूषण बढ़ रहा है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वीरवार को 170 तक पहुंच गया। शाम को इसमें और वृद्धि हुई। बुधवार की रात करीब 10 बजे शहर में एक्यूआई 520 दर्ज किया गया। प्रदूषण बढ़ने का असर दिखने लगा है। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले कुछ दिनों में सांस की तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।
शाम 7 से सुबह 7 बजे तक प्रदूषण बढ़ रहा है। बुधवार को दिन के समय एक्यूआई 159 दर्ज किया गया, जबकि रात 10 बजे के बाद यह तेजी से बढ़ा और 520 तक पहुंच गया। यह स्तर सामान्य से पांच गुना ज्यादा है। शहर की हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पाई गई है। इसका कारण निर्माण स्थलों पर धूल, वाहनों का धुआं, खेतों में पराली जलाना माना जा रहा है।
दो दिनों से मशीन में भी आई गड़बड़ी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से जिला सचिवालय के पास डीआरओ कार्यालय पर लगाई गई प्रदूषण स्तर मापने वाली मशीन दो दिनों से सही काम नहीं कर रही थी। अधिकारियों ने बताया कि मशीन का इंटरनेट से कनेक्शन टूट गया था। अब इसे दुरुस्त करवा दिया गया है। अब मशीन पहले की भांति अपना रिकॉर्ड ऑनलाइन दिखा रही है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के एसडीओ रणदीप संधू का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण पर संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ग्रेप-2 के नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा।
एक्यूआई का असर
0-50 : स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं
51-100 : स्वास्थ्य पर हल्का प्रभाव
101-200 : संवेदनशील लोगों पर असर
201-300 : सांस संबंधी परेशानी
301-400 : स्वास्थ्य के लिए खतरनाक
401 से अधिक : स्वास्थ्य के लिए गंभीर, आपात स्थिति
ग्रेप-2 स्थिति : वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेड रिस्पांस एक्शन प्लान का एक चरण है, जो ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता स्तर पर लागू होता है। इसके तहत कुछ प्रतिबंधों में डीजल जनरेटर चलाने पर रोक, प्राइवेट वाहनों की पार्किंग फीस बढ़ाना और सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों की सेवाएं बढ़ाना शामिल है।