कैथल। स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी के तहत विशेष जांच अभियान चलाया गया।
उपायुक्त अपराजिता के निर्देश पर आरटीए गिरिश की अगुवाई में यह अभियान चला। अतिरिक्त अनाज मंडी में जिले के विभिन्न स्कूलों की 28 बसों को जांच के लिए बुलाया। निरीक्षण के दौरान चार बसों में सुरक्षा संबंधी खामियां मिलीं। इनमें दो बसों में अनिवार्य जीपीएस सिस्टम नहीं लगा था, जबकि दो बसों में निर्धारित स्पीड लिमिट के अनुरूप स्पीड गवर्नर नहीं पाया गया।
संबंधित बस संचालकों को जल्द से जल्द कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर अनिल सैनी, ट्रांसपोर्ट सब इंस्पेक्टर धर्मबीर, यातायात शाखा से इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह मौजूद रहे। अधिकारियों ने बसों के दस्तावेजों के साथ-साथ सुरक्षा मानकों की भी विस्तार से जांच की।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कूल सुरक्षित वाहन पॉलिसी के तहत प्रत्येक स्कूल बस में फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, निर्धारित गति सीमा वाला स्पीड गवर्नर, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), मजबूत दरवाजे, बच्चों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्कूल बस का स्पष्ट पीला रंग, आगे-पीछे स्कूल बस का अंकन, चालक का वैध लाइसेंस और निर्धारित अनुभव, परिचालक (अटेंडेंट) की उपलब्धता और सभी आवश्यक सुरक्षा संकेतक होना अनिवार्य है। इसके अलावा बस की खिड़कियों, ब्रेक, टायर, लाइट, हॉर्न और अन्य यांत्रिक उपकरणों का सही स्थिति में होना भी जरूरी है।
मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर अनिल सैनी ने कहा कि इन जांच अभियानों का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं बल्कि स्कूल वाहनों को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों से अपील की कि वे समय-समय पर अपनी बसों का रखरखाव कराएं और निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।