जींद। परिवार से अलग होने और आर्थिक तंगी का सामना करने के बावजूद रिंकू ने हौसला नहीं छोड़ा। मुश्किल हालातों से लड़ते हुए आज वह न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं। आज वह शहर की दीवानखाना मार्केट में अपना पार्लर चलाती हैं।
रिंकू के पति के पास गांव में कम जमीन थी। इसमें होने वाली खेती से परिवार का गुजारा और बच्चों की फीस तक देने में असमर्थ थे लेकिन ऐसे में आर्थिक दबाव और बढ़ गया। ऐसे में रिंकू ने घर की जिम्मेदारी बांटने के लिए कोई काम सीखने का निर्णय लिया।
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मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि कुछ ही समय में उनके काम को पहचान मिलने लगी और ग्राहकों की संख्या भी बढ़ती चली गई। रिंकू ने केवल आर्थिक स्थिति सुधारी ही नहीं बल्कि समाज में भी एक अलग पहचान बनाई है।
शहर की स्लम बस्तियों में रहने वाली जरूरतमंद बेटियों की शादी में वह उन्हें निशुल्क तैयार करती हैं। रिंकू बताती हैं कि शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, कभी ग्राहक नहीं मिलते थे कभी सामान खरीदने के पैसे नहीं होते थे लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलते गए। अब वह अपने परिवार का खर्च आराम से चला रही हैं और बच्चों की शिक्षा में भी बढ़-चढ़कर ध्यान दे पा रही हैं।