सिंचाई विभाग ने 30 साल पहले बनी बासड़ा-2 माइनर की रिमॉडलिंग का फैसला लिया है। तीन दशक पहले बनी यह नहर अब पूरी तरह से बंद पड़ी है। इस नहर के दोबारा चालू किए जाने से बालसमंद तथा बुड़ाक गांव के लोगों को पीने व खेती लिए नहरी पानी मिल सकेगा। सिंचाई विभाग ने इस नहर को अपने अधीन लेने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।अब इसका टेंडर तैयार किया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट वर्ष 2018 से लंबित है। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि इस परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। करीब छह माह में टेंडर किए जाने की उम्मीद है। राजस्थान की सीमा के साथ लगते तथा प्रदेश के आखिरी गांव बुड़ाक में पानी की समस्या है। इस गांव में पिछले तीन दशकों से नहरी पानी नहीं पहुंच रहा।
जिसके चलते बालसमंद, बुड़ाक सहित बार्डर पर लगते कई गांव पीने का पानी भी राजस्थान से लेकर आते हैं। इन गांवों में टेल पर नहरी पानी नहीं पहुंचने के कारण खेती भी कम हो पा रही है। किसानों की भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच रही है। पानी की मांग को लेकर इस गांव के लोगों ने 2014 के विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने का एलान भी किया था।
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता आनंद श्योराण ने बताया कि विभाग के इंजीनियर इन चीफ राकेश चौहान के समक्ष जल संघर्ष समितियों ने यह मांग उठाई थी। जिस पर उन्होंने इसे सहमति प्रदान कर दी है। हम इसका एस्टीमेट तैयार कराएंगे। करीब छह महीने में इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
पानी की मांग को लेकर बालसमंद क्षेत्र के इन गांवों ने लंबा आंदोलन चलाया था। जिसके बाद प्रदेश के तात्कालिक सीएम मनोहर लाल ने किसानों को टेल तक पानी पहुंचाने का भरोसा दिया था। पेयजल के लिए नया प्रोजेक्ट देने का एलान किया था। जिसके तहत 25 करोड़ रुपये की लागत से पानी की लाइन बिछाने तथा बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण कराया गया। जिससे छह गांवों को पानी दिया जा रहा है।