गोरखपुर। सुनीता देवी गृहिणी हैं, 45 साल के आसपास उम्र है। वजन सामान्य से अधिक है और डायबिटीज की मरीज भी हैं। उठते ही उनकी एड़ी में तेज दर्द होता है, छह माह तक वह इसे नजरअंदाज करती रहीं। लगातार अनदेखी के कारण एक वक्त ऐसा आया कि उनके लिए रोजमर्रा के काम निपटाना भी मुश्किल हो गया। एम्स में दिखाने गईं, जांच हुई तो डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें प्लांटर फेशिआइटिस है। वजन नियंत्रित करने, नियमित व्यायाम, आरामदायक जूते पहनने और दवाओं के साथ फिजियोथेरेपी की सलाह दी गई।
इसी तरह की बीमारी की पहचान 42 वर्षीय बैंक कर्मचारी राजेश कुमार में हुई, जब वे एम्स दिखाने पहुंचे। राजेश फिटनेस के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलते थे। उन्हें एड़़ी में चुभन महसूस हुई, पर उन्होंने अनदेखी कर दी। यह दर्द जब असहनीय हुआ तो तब वह डॉक्टर के पास पहुंचे। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया और दर्द काफी हद तक नियंत्रित हो गया।
ये दो उदाहरण हैं। इस तरह के तीन से चार मामले रोज एम्स के हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय भारती ने बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने, डायबिटीज, हाइपोथायरॉइड, ज्यादा वजन, एड़ी में चोट लगने या फ्रैक्चर के साथ मांसपेशियों में खिंचाव और मोच से प्लांटर फेशिआइटिस हो सकता है। 40 से अधिक उम्र होने से पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने से यह तकलीफ हो सकती है। साथ ही अत्याधिक टहलने और दौड़ लगाने से भी पैरों में दर्द होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे लोग जिनके पैर फ्लैट हैं या जिनके पैरों के आर्च बहुत ऊंचे हैं, उन्हें प्लांटर फेशिआइटिस का जोखिम अधिक रहता है।
ये भी ध्यान रखें
डॉ. अजय कहते हैं कि कठोर सतहों पर नंगे पैर लंबे समय तक चलते हैं या देर तक खड़े रहते हैं तो इससे पैरों का दर्द बढ़ता है। ज्यादा टाइट जूते पहनने के कारण पैरों की मांसपेशियों पर जोर पड़ सकता है। इससे समस्या हो सकती है। बिना स्ट्रेचिंग या वार्मअप के व्यायाम करने, हाई हील्स वाले चप्पल या जूते पहनने से इसका खतरा बढ़ता है। इसके अलावा पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। एड़ी में लगातार बने रहने वाले दर्द को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। भले ही यह दर्द मामूली हो लेकिन यह एक ऐसी समस्या की ओर इशारा हो सकता है, जिस पर ध्यान न देने पर आगे चलकर स्थिति और गंभीर हो सकती है।