जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति अब रोज ताल का निरीक्षण करेगी और वहां की स्थिति से सचिव को अवगत कराएगी। सचिव ने बताया कि मछलियों के मरने की जानकारी मिलने के बाद प्राधिकरण की टीम ने रामगढ़ताल का निरीक्षण किया। ताल में 100 से 150 मछलियां मरी पाई गई हैं।
रामगढ़ताल में शुक्रवार और शनिवार को एकबार फिर बहुत सारी मछलियां मरी हुई मिलीं। ताल की बदहाली का आलम यह है कि इसमें करीब 80 एमएलडी गंदा पानी रोजाना गिराया जा रहा है, लेकिन सफाई केवल 50 एमएलडी की ही हो पा रही है।
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गंदगी की वजह से ताल के पानी में ऑक्सीजन तेजी से कम हो रहा है। इससे मछलियों की जान जा रही है। हालांकि मरीं मछलियों को बाहर निकालकर ताल की सफाई कराई जा रही है लेकिन अभी भी बदबू बरकरार है। इससे वहां से गुजरने वाले पर्यटक भी परेशान हैं।
रामगढ़ताल में शुक्रवार को बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं। शनिवार को भी बड़ी संख्या में मछलियां मरी पाई गईं। बताया जा रहा है कि ये मछलियां ऑक्सीजन की कमी से मरी हैं। ताल की सतह पर काई जम गई है जिससे पानी हरा नजर आ रहा है। पैडलेगंज और कुनराघाट के पास तो पानी का रंग काला हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ताल में एल्गल ब्लूम (शैवाल प्रस्फुटन) बढ़ गया है। यह नाइट्रेट और फॉस्फेट की अधिकता से यह बढ़ता है। यह अधिकता प्रदूषण की वजह से होती है। काई जमने से ताल में ऑक्सीजन की कमी हो रही है।
रामगढ़ताल के पानी को ट्रीट करने के लिए फिलहाल दो एसटीपी काम कर रहे हैं। इसमें चिड़ियाघर के पास 35 एमएलडी और कुनराघाट में 15 एलएलडी का एसटीपी है। सूत्रों के मुताबिक, ताल में करीब 80 एमएलडी पानी गिर रहा है लेकिन साफ केवल 50 एमएलडी ही हो रहा है। इस वजह से इसमें तेजी से गंदगी बढ़ रही है।
गोड़धोइया नाले से जुड़े 17 मोहल्लों का गंदा पानी रामगढ़ताल में गिर रहा है। इस पानी के प्राकृतिक विधि से शोधन के लिए कुनराघाट के पास उपाय किए गए हैं, फिर भी केमिकलयुक्त पानी से वहां पर सफेद झाग बन रहा है।
ताल में मरी मछलियां खोजते नाविक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ताल में बढ़ा जैविक प्रदूषण
पर्यावरणविद प्रो. गोविंद पांडेय ने कहा कि रामगढ़ताल में जैविक प्रदूषण बढ़ रहा है। ताल के जल में ऑर्गेनिक मैटर की अधिकता हो गई है जिसकी वजह से उसमें प्रदूषण बढ़ा है। ताल में काई बड़ी मात्रा में हो गई है। इस वजह से दिन में ऑक्सीजन मिल जाता है लेकिन रात में इसकी कमी हो जाती है।
इससे बड़ी मछलियां मरती हैं क्योंकि उनको ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत है। समय-समय पर ताल के पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। पानी का हरा दिखना ही चिंता का विषय है। नाइट्रेट और फॉस्फेट की जब अधिकता होती है तो उसी वजह से एल्गल ब्लूम बढ़ता है।
ताल में किया गया छिड़काव
रामगढ़ताल में शनिवार को सहारा एस्टेट से मोहद्दीपुर स्मार्टव्हील की ओर जलकुंभी के बीच काफी संख्या में मृत पड़ी मछलियां दिख रही थीं। जीडीए की टीम ने मछलियों को निकालने के साथ पानी में रसायन का छिड़काव किया। सफाई पर सर्वाधिक जोर पैडलेगंज रिंग रोड से स्मार्टव्हील, पैडलेगंज से नया सवेरा वन और चिड़ियाघर से सहारा एस्टेट गेट तक रहा।
सहायक संपत्ति अधिकारी यशवंत सिंह ने बताया कि चूने और फिटकरी का मिक्स घोल बना कर छिड़काव कराया जा रहा है ताकि पानी में हरा शैवाल कट जाए। किसी रसायन का छिड़काव नहीं किया जा सकता क्योंकि मछलियां पाली जाती हैं।
ताल की सफाई की निगरानी के लिए बनाई गई टीम
जीडीए सचिव पुष्पराज सिंह ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति अब रोज ताल का निरीक्षण करेगी और वहां की स्थिति से सचिव को अवगत कराएगी। सचिव ने बताया कि मछलियों के मरने की जानकारी मिलने के बाद प्राधिकरण की टीम ने रामगढ़ताल का निरीक्षण किया।
ताल में 100 से 150 मछलियां मरी पाई गई हैं। प्राधिकरण की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर मछलियों की मौत किस कारण हुई है। सचिव ने बताया कि समिति की अध्यक्षता ओएसडी प्रखर उत्तम करेंगे। इसमें प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों के साथ स्थानीय मछुआरों को भी रखा गया है। ये प्रतिदिन ताल का निरीक्षण करेंगे और वहां की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट सचिव को सौंपेंगे।