धनेश के अपहरण से परेशान पत्नी नौ फरवरी को शाहपुर थाने पर गई। वहां से उनको पिपराइच थाने जाने को कहा गया। बेटे के साथ निशा पिपराइच थाने गई। पुलिस से फरियाद कर ही रही थी कि उसी दौरान मोबाइल पर आरोपितों की कॉल आई। निशा ने उसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने आरोपित को पकड़ने के लिए निशा से कहलवाया कि ढाई लाख रुपये की व्यवस्था हो गई। अपहर्ताओं ने जीयनपुर चौराहे पर रकम के साथ बुलाया। साथ ही पुलिस को सूचना न देने की धमकी भी दी। निशा रोडवेज बस से आजमगढ़ गई और जीयनपुर स्टेशन पर पहुंची तो रात हो गई।
बस स्टेशन से ही उसने उस नंबर पर कॉल की। उधर, पिपराइच पुलिस ने जीयनपुर पुलिस को जानकारी दे दी थी। दोनों थानों की पुलिस ने कुछ दूरी पर घेराबंदी कर ली। बाइक से दो युवक रकम लेने आए, जिन्हें पुलिस ने पकड़ लिया। पूछताछ में पता चला कि धनेश को एक फार्म हाउस में बंधक बनाकर रखा गया था। दोनों युवकों को लेकर फार्म हाउस पर पुलिस ने छापा डालकर धनेश को मुक्त कराने के साथ ही एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसके पास से दो असलहे बरामद हुए।
पकड़ा गया व्यक्ति फार्म हाउस मालिक का भाई बताया जा रहा है। फार्म हाउस मालिक का नाम आने पर पहले तो जीयनपुर पुलिस वहां जाने से कतराने लगी, बाद में जब पहुंची तो एक अफसर ने अपहर्ताओं का बचाव किया। अफसर ने बताया कि लेनदेन का मामला है। धनेश ने रकम ली थी, जिस वजह से उसे पकड़ा गया था। हालांकि निशा का कहना है कि उनके पति ने किसी से रकम नहीं ली थी, अपहर्ता झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने फिरौती मांगी, उसकी रिकार्डिंग भी है।