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Gorakhpur News: अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करें भौतिकी के शिक्षक व शोधार्थी

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में ''''''''रेडियोएक्टिविटी के मूल सिद्धांत और उसके अनुप्रयोग'''''''' विषय पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सोमवार को शुभारंभ हो गया। इसमें देश के अग्रणी वैज्ञानिकों ने रेडियोएक्टिविटी की उपयोगिता और उसके वैज्ञानिक, ऐतिहासिक व सामाजिक आयामों पर चर्चा की।
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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भौतिकी के शिक्षक और शोधार्थी अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करें। उन्होंने कहा कि भौतिकी के शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास से विश्वविद्यालय ने नेचर इंडेक्स रैंकिंग में जगह बनाई। मुख्य अतिथि इंटर यूनिवर्सिटी एक्सीलिरेटर सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. अविनाश पांडेय ने बताया कि रेडियोजेनिक आइसोटोप्स और पेरेंट-डॉटर न्यूक्लियोटाइड्स के अध्ययन से पृथ्वी पर घटित करोड़ों वर्ष पुरानी घटनाओं का पता लगाया जा सकता है।

बीएआरसी, मुंबई के डॉ. तपस दास ने कहा कि रेडियोएक्टिव तकनीक से फलों और सब्जियों को सड़ने से बचाया जा सकता है। वर्तमान में विश्व का लगभग 33 प्रतिशत भोजन नष्ट हो जाता है। यदि यह तकनीक व्यापक रूप से अपनाई जाए तो वैश्विक भूखमरी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने किया। संचालन डॉ. अपरा त्रिपाठी ने और धन्यवाद ज्ञापन डीन साइंस प्रो. शांतनु रस्तोगी ने किया।
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