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Gorakhpur News: बालक की मौत का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग...अब भी कई जगहों पर नाले खुले

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गोरखपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने चिलुआताल थाना क्षेत्र के मुड़िला उर्फ मुंडेरा निवासी श्याम सुंदर चौरसिया के बेटे कन्हैया (12) की खुले निर्माणाधीन नाले में गिरकर हुई मौत के मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने डीएम और एसएसपी को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। हालांकि, घटना के बाद कमिश्नर के निर्देश पर शहर के खुले नालों को ढंकने का काम शुरू किया गया, लेकिन अभी कई जगहों पर नाला खुले ही हैं और खतरा बना हुआ है।
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18 फरवरी 2026 को वार्ड नंबर 5, मानबेला, राप्तीनगर विस्तार कॉलोनी से कन्हैया चौरसिया घर लौट रहा था। रास्ते में निर्माणाधीन नाले में साइकिल सहित गिर गया। घटना के दौरान नाले में रखी अतिरिक्त लोहे की सरिया हटाई नहीं गई थीं और ढक्कन भी नहीं लगाया गया था। सरिया उसके शरीर में घुस गई, जिससे गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत परिवार को सूचना दी और कन्हैया को बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मामले में परिवार ने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की थी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने घटना का संज्ञान लेते हुए डीएम दीपक मीणा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो हफ्ते के अंदर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें बालक के परिवार को दिए गए मुआवजे की स्थिति और ठेकेदार की जिम्मेदारी के बारे में जानकारी शामिल है।
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आयोग ने कहा है कि अगर मीडिया रिपोर्ट में बताए गए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। मामले की जांच में स्थानीय पुलिस के साथ-साथ निर्माण कार्य में जिम्मेदार ठेकेदार की लापरवाही की भी पड़ताल की जाए। बालक की मौत ने न सिर्फ परिवार को दुखी किया है बल्कि इलाके में सुरक्षा और निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है। एनएचआरसी की नोटिस के बाद अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे मामले की पूरी रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजें और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।


पिता ने वेलेंटाइन डे के दिन गिफ्ट की थी साइकिल

श्याम सुंदर चौरसिया के तीन बेटों में कन्हैया सबसे बड़ा था। उसके अलावा छह साल का शिवा और आठ साल का किशन है। श्याम सुंदर सब्जी बेचते हैं। उनकी पत्नी साधना गृहिणी हैं। कन्हैया को साइकिल चलाने का बहुत शौक था। 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के दिन 2600 रुपये की एक साइकिल खरीदकर कन्हैया को गिफ्ट किया था। चार दिन बाद ही यह घटना हो गई।


3.50 लाख मिला था कैश, मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद का आश्वासन
बालक की मौत के बाद देर रात गुलरिहा पार्षद प्रतिनिधि यूसुफ आजाद के साथ मृतक के पिता श्याम सुंदर चौरसिया, चाचा व गांव से दो अन्य लोग जीडीए ऑफिस पहुंचे थे। वहां जीडीए सचिव से मुलाकात की। जीडीए सचिव और एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह ने मुआवजे के तौर पर 3.50 लाख रुपये नकद दिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद दिलवाने का आश्वासन दिया है। उधर, घटना के बाद देर शाम जीडीए की टीम घटना स्थल पहुंची थी और नाले को ढक दिया गया था।

कहीं नाले पर डाले स्लैब और चलाई दीवार तो कहीं वैसे ही छोड़ दिया
गोरखपुर। शहर में नालों पर स्लैब लगाने का काम जिम्मेदारों ने अधूरा ही छोड़ दिया। इससे राहगीरों के लिए खतरा बना हुआ है। हालांकि, कई स्थानों पर स्लैब डाले गए हैं और नालाें के किनारे दीवार भी चलाई गई है।
पार्क रोड पर एक निजी मॉल के सामने कार्मल रोड के किनारे नाला अभी खुला है, स्लैब नहीं डाला गया है। इसी तरह फिराक चौराहा से बेतियाहाता की ओर जाने वाले मार्ग पर बायीं तरफ भी नाला खुला पड़ा है। राहगीर सुनील जायसवाल ने बताया कि अगर संभलकर नहीं चले तो नाले में गिर सकते हैं।
काली मंदिर से आगे दाउदपुर रोड पर नाले की पुलिया की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। यहां के निवासी रतन श्रीवास्तव का कहना है कि इस रोड पर लोगों की आवाजाही ज्यादा है, रात में कभी भी हादसा हो सकता है। वहीं, मुंशी प्रेमचंद पार्क के सामने भी दो स्थानों पर नालों पर स्लैब नहीं लगाए गए हैं। इसके अलावा मानबेला में पत्रकारपुरम काॅलोनी के पीछे सड़क के दोनों तरफ नाले खुले हैं। इसके आगे जाने पर भी एक नाले पर जगह-जगह स्लैब नहीं हैं।
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इस संबंध में अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र ने बताया कि नगर निगम की ओर से लगभग सभी नाले ढंक दिए गए हैं। कुछ जगहों पर दीवार बनाई जा रही है।
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