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Gorakhpur News: गोरखपुर में नशे की खेप का बढ़ता कॉरिडोर, विदेशी ‘ओजी’ से लेकर बड़ी खेप तक पकड़ी

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- अलग-अलग कार्रवाई में सामने आईं सप्लाई चेन की कड़ियां, कभी नेपाल-बिहार, अब थाईलैंड तक जुड़ रहे तार
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- विदेशी स्रोत से आने वाले हाइड्रोपोनिक गांजे पर एजेंसियों की नजर

- मोबाइल और डिजिटल संपर्कों के जरिये नेटवर्क की पिछली और अगली कड़ियां तलाश रहीं जांच एजेंसियां

गोरखपुर। जिले में नशीले पदार्थों की लगातार हो रही बड़ी बरामदगी बताती है कि यह इलाका सिर्फ नशे की खपत का बाजार नहीं, बल्कि अलग-अलग रूट से आने वाली खेपों के लिए ट्रांजिट कॉरिडोर भी बनता जा रहा है। हाल की कार्रवाई में नेपाल, बिहार और थाईलैंड तक जुड़े स्रोत सामने आए हैं। तस्कर खेप को अलग-अलग वाहनों और डिलीवरी पॉइंट के जरिये आगे बढ़ाते हैं। कई मामलों में स्थानीय खरीदार और सप्लायर अलग-अलग होने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार, नवंबर 2025 में चौरीचौरा के दुबियारी पुल के पास एसटीएफ ने 6.35 क्विंटल गांजा पकड़ा था। कार्रवाई में पांच तस्कर गिरफ्तार किए गए थे। जांच में इनके तार बिहार और नेपाल से जुड़े मिले थे। आरोपियों के मोबाइल की जांच में 50 से अधिक संदिग्धों के नाम और नंबर सामने आने की जानकारी भी दी गई थी। इससे नेटवर्क के एक खेप तक सीमित न होकर कई स्तरों पर सक्रिय होने के संकेत मिले थे।
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जनवरी 2026 में एकला बांध क्षेत्र में एएनटीएफ ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर 1.025 किलो स्मैक और करीब 770 ग्राम हाइड्रोपोनिक ‘ओजी’ बरामद किया था। दोनों मादक पदार्थों की अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2.35 करोड़ रुपये बताई गई थी। यह कार्रवाई भी इस बात का संकेत थी कि गोरखपुर में पारंपरिक गांजे के साथ महंगे हाइड्रोपोनिक गांजे की सप्लाई ने जगह बनाई है।
31 मई को गोरखपुर रेलवे स्टेशन क्षेत्र के पास एएनटीएफ ने 770 ग्राम हाइड्रोपोनिक ‘ओजी’ गांजा बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया था कि विदेशी गांजे की खेप थाईलैंड से देश में लाई गई और कोलकाता व बिहार के रास्ते गोरखपुर पहुंचाई गई थी। स्टेशन के आसपास इसकी डिलीवरी की तैयारी थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी खेप लेकर पहुंचा था जबकि दूसरा खरीदार के तौर पर वहां आया था।

सीमा और एयर रूट भी जांच के दायरे में
गोरखपुर मंडल और आसपास के क्षेत्र में केवल सड़क मार्ग ही नहीं, सीमा और हवाई रूट से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। फरवरी 2026 में सोनौली सीमा पर एसएसबी और पुलिस ने करीब आठ किलो हाइड्रोपोनिक वीड के साथ दो लोगों को पकड़ा था। इसकी कीमत करीब आठ करोड़ रुपये बताई गई थी।
मई 2026 में लखनऊ एयरपोर्ट पर गोरखपुर निवासी युवक को बैंकॉक से लाई गई 2.85 किलो हाइड्रोपोनिक वीड के साथ पकड़ा गया था। बरामद खेप की कीमत करीब 2.86 करोड़ रुपये बताई गई थी। इससे विदेशी ‘ओजी’ की तस्करी में अलग-अलग परिवहन माध्यमों के इस्तेमाल की जांच को भी बल मिला।
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नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटीं एजेंसियां
मौजूदा मामले में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी स्रोत से आने वाली खेप किस स्तर पर अलग-अलग लोगों को सौंपी जाती है। मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल संपर्कों की जांच से सप्लायर, कैरियर और खरीदारों के बीच संबंध जोड़ने की कोशिश की जा रही है। गोरखपुर में लगातार सामने आ रही बड़ी बरामदगी के बीच एजेंसियों के सामने अब चुनौती सिर्फ खेप पकड़ने की नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की अगली और पिछली कड़ियों तक पहुंचने की है।
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