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हम उम्र मिले तो दिन छोटे हो गए: अकेलेपन से जूझ रहे 207 बुजुर्गों को मिला दूसरा घर, लौटी मुस्कान

Thu, 01 Oct 2026 12:46 PM IST
Rohit Singh दिव्यात्मा राय, संवाद न्यूज एजेंसी/गोरखपुर

सार

रिटायरमेंट के बाद जब अकेलेपन से दिन पहाड़ जैसे लगने लगे थे, तब नगर निगम के सिटीजन केयर सेंटर में हमउम्रों का साथ मिला तो जिंदगी फिर खिलखिलाने लगी। वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए यह सेंटर दूसरा घर बन गया है। सुबह योग से शुरू होती है, दिन कैरम, लाइब्रेरी, अखबार और हंसी-ठिठोली में बीत जाता है।
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सीनियर सिटिजन केयर में बैठक करते वरिष्ठ नागरिक लोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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उम्र की दूसरी पारी में जब घर की चहारदीवारी के बीच अकेलेपन से दिन पहाड़ जैसे लगने लगे थे, तब हमउम्रों का साथ मिला तो वही दिन छोटे हो गए। नगर निगम का सिटीजन केयर सेंटर वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए ऐसा ठिकाना बन गया है, जहां सुबह की शुरुआत योग से होती है और दिन हंसी-ठिठोली, बातचीत, कैरम और अखबार पढ़ने के बीच कब गुजर जाता है, पता ही नहीं चलता।

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यहां आकर बुजुर्गों की जिंदगी में फिर से दोस्ती और अपनापन लौट आया है। घर की जिम्मेदारियों से कुछ पल निकालकर महिलाएं भी यहां पहुंचती हैं और खुद के लिए वक्त बिताती हैं। सेंटर में स्वास्थ्य शिविर से लेकर लाइब्रेरी, कैरम, टीवी, स्वच्छ पेयजल, कैंटीन, इंडोर गेम्स, पेंटिंग और कानूनी सलाह तक की सुविधा उपलब्ध है।

वरिष्ठ नागरिकों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्यान, योग, अध्यात्म, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर और फिजियोथेरेपी की कक्षाएं भी समय-समय पर आयोजित की जाती हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले बुजुर्गों के लिए यह महज समय बिताने की जगह नहीं, बल्कि अपनेपन और सक्रिय जीवन का केंद्र बन गया है। 

207 सदस्य, हर सुविधा का रखा जाता है ध्यान
सेंटर के अध्यक्ष प्रहलाद दास गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में महिला और पुरुष मिलाकर 207 सदस्य सेंटर से जुड़े हैं। सदस्यों के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी जरूरतों और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि वे यहां सहज महसूस करें।

संयोजक अशोक मिश्रा ने बताया कि सेंटर का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को अकेलेपन से निकालकर सामाजिक रूप से जोड़ना है। यहां आने वाले लोग एक-दूसरे से बातचीत करते हैं, अपने अनुभव साझा करते हैं और कई गतिविधियों में साथ हिस्सा लेते हैं। धीरे-धीरे यह माहौल एक परिवार जैसा बन गया है।

रिटायरमेंट के बाद मुश्किल था समय काटना
गिरजा शंकर तिवारी ने बताया कि रिटायरमेंट के बाद समय काटना मुश्किल होता था। दिन लंबा लगता था और घर में भी बातचीत का दायरा सीमित हो जाता था। सेंटर से जुड़ने के बाद अब दिन कैसे बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। यहां पुराने मित्रों जैसा माहौल मिलता है और हमउम्र लोगों के साथ बातचीत में काफी समय निकल जाता है।

प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि सेंटर आने से मन हल्का रहता है। योग, भजन और इंडोर गेम्स से शरीर को सक्रिय रखने का मौका मिलता है। साथियों के बीच बातचीत और हंसी-मजाक से मन भी प्रसन्न रहता है। उनके लिए यह सेंटर किसी दूसरे घर जैसा है।

महिलाओं को मिला खुद के लिए समय
सेंटर पर आने वाली अनिता जाजोदिया ने बताया कि महिलाओं का ज्यादातर समय घर और परिवार की जिम्मेदारियों में निकल जाता है। ऐसे में अपने लिए समय निकालना मुश्किल होता है। सेंटर आने के बाद कुछ समय खुद के लिए मिल जाता है।

नीलिमा गौड़ ने बताया कि पहले घर के काम निपटाने के बाद समय बिताने के लिए अलग-अलग जगह तलाशनी पड़ती थी। सेंटर बनाए जाने के बाद काफी सहूलियत हुई है। एक ही जगह पर कई तरह की सुविधाएं मिल जाती हैं और परिचित लोगों का साथ भी रहता है।
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रचना धुलिया ने बताया कि महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सेंटर में कैरम, लाइब्रेरी और वकील कक्ष जैसी सुविधाएं हैं। किसी कानूनी समस्या पर वकील से सलाह ली जा सकती है। साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविर में स्वास्थ्य की जांच भी हो जाती है। इस तरह सेंटर में मनोरंजन के साथ स्वास्थ्य और जरूरी सलाह की सुविधा भी मिल रही है।
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