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UP: दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे 21 साल के अमृत, 5 साल के बच्चे जैसे दिखते हैं- इलाज के साथ पढ़ाई जारी

Thu, 21 May 2026 10:35 AM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

एम्स गोरखपुर के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देव आदित्य दास ने बताया कि अमृत को एमपीएचडी है। इसमें शरीर में कई जरूरी हार्मोन विकसित नहीं होते। जन्म से ही शारीरिक विकास बेहद धीमा रहा। वर्तमान में उनका वजन मात्र 23 किलोग्राम है और युवावस्था के सामान्य लक्षण भी विकसित नहीं हुए हैं।
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युवक को बालमुकुंद ट्रस्ट की तरफ से दिया गया इंजेक्शन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बिहार के गोपालगंज में रहने वाले अमृत श्रीवास्तव 21 साल की उम्र में पांच साल के बच्चे जैसे दिखते हैं। असामान्य शारीरिक विकास के कारण उन्हें स्कूल से लेकर कॉलेज तक, सहपाठियों और आसपास के लोगों का तंज सहना पड़ा। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। खुद के इलाज के साथ पढ़ाई भी जारी रखी।

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उनका इलाज कर रहे एम्स के डॉक्टर भी उनके हौसले को सलाम करते हैं। इतना ही नहीं, बीमारी से लड़ने का उनका साहस देखकर महंगे इलाज का खर्च उठाने के लिए शहर की एक संस्था भी आगे आई है।

अमृत का इलाज भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग में चल रहा है। उनका इलाज कर रहे डॉ. देव आदित्य दास ने बताया कि उन्हें मल्टीपल पिट्यूटरी हार्मोन डेफिशियेंसी (एमपीएचडी) नामक एक दुर्लभ बीमारी है।

उनके मुताबिक, युवक मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम हैं और पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। बीमारी के कारण उनकी हड्डियों और शरीर का विकास रुक गया। शारीरिक विकास जन्म से ही बेहद धीमा रहा। उसकी लंबाई, वजन और हार्मोन सामान्य उम्र के अनुसार नहीं बढ़ पाए।

जांच में पाया गया कि उनके शरीर में कई जरूरी हार्मोन विकसित नहीं हुए हैं। युवक का वजन मात्र 23 किलोग्राम है और उनमें युवावस्था के सामान्य लक्षण भी विकसित नहीं हुए हैं।हर रोज खुद ही इंजेक्शन लगाते हैं अमृतडॉ. दास ने बताया कि अमृत के शरीर में थायराइड और स्टेरॉयड हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन रहे हैं। इलाज के तहत उसे विशेष हार्मोन इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। हर रोज अमृत खुद ही इंजेक्शन भी लगाते हैं।

डॉ. आदित्य कहते हैं कि इलाज करीब चार से पांच साल तक चलेगा। इसके बाद उनके शारीरिक विकास में सुधार की उम्मीद है। डॉक्टर कहते हैं कि तमाम तानों के बावजूद अमृत ने ग्रेजुएशन तक का सफर तय किया है। जिस विश्वास के साथ वह अपना इलाज करवा रहे हैं, वह नई ऊर्जा देने वाला है।

सराहनीय : इलाज में मदद को आगे आया ट्रस्ट
डॉ.आदित्य ने बताया कि इस बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं होता। बहुत महंगा भी है, जिसे एक गरीब परिवार वहन नहीं कर सकता। इलाज में आर्थिक मदद के लिए बालमुकुंद लाल स्टेट ट्रस्ट आगे आया है। ट्रस्ट ने युवक को जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध कराए हैं ताकि उनका इलाज बाधित न हो।
 

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ट्रस्टी सदस्य अनंत प्रकाश अग्रवाल, राजीव रंजन अग्रवाल, अखिलेश चंद्र अग्रवाल एवं कार्यालय प्रमुख प्रहलाद दास गोयल ने इलाज में मदद की पहल की है। एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने ट्रस्ट के सहयोग की सराहना की और इस पहल को जरूरतमंद मरीजों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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