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Jamison Lee Greer: ट्रंप के खास और अमेरिका के 20वें व्यापार प्रतिनिधि; टैरिफ नीति के निर्माण में अहम भूमिका

Sat, 28 Feb 2026 08:07 AM IST
Pavan अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jamison Lee Greer: साधारण परिवार में पले-बढ़े, बेहद नपा-तुला बोलते हैं, खूब पढ़ते-लिखते हैं और विक्टर ह्यूगो के उपन्यास लेस मिजरेबल के दीवाने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की जिस टैरिफ नीति ने दुनिया के विभिन्न देशों की नींदें उड़ाई हुई हैं, उसके वास्तुकार यही जैमिसन ली ग्रीर हैं।
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पहचान - शख्स: जैमिसन ली ग्रीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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स्कूल की घंटी बजते ही बाकी बच्चे मैदान की ओर भागते थे, पर एक दुबला-पतला लड़का अक्सर खेलने के बजाय दुनिया का नक्शा फैलाकर बैठ जाता। उसे देशों की सीमाएं याद करना नहीं, बल्कि यह समझना अच्छा लगता था कि कौन-सा देश क्या बनाता है और चीजें एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाती हैं। एक दिन उत्सुकतावश उसने अपनी मां से पूछा, 'अगर खिलौना चीन में बनता है, दुकान अमेरिका में है और खरीदार कोई और है, तो असली मालिक कौन है?' परिवार ने तो इसे बचपन की जिज्ञासा समझकर हंसी में टाल दिया, पर इसी तरह की जिज्ञासाएं उसकी पेशेवर सोच की नींव बनीं। उसने बचपन में ही पड़ोस के बच्चों के साथ मिलकर एक 'मिनी ट्रेड क्लब' बना लिया था। क्लब के बच्चे आपस में कॉमिक्स, कार्ड और वीडियो गेम की अदला-बदली करते थे, लेकिन वह लड़का हर अदला-बदली के लिए नियम लिखता-जैसे 'अगर हालत खराब है, तो मूल्य कम', 'देर से लौटाने पर जुर्माना' आदि। यह लड़का है जैमिसन ली ग्रीर, जिसे 2025 में 20वें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के रूप में सीनेट से मंजूरी मिली और इसके तुरंत बाद ही उन्होंने अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' व्यापार नीतियों, चीन पर चल रहे टैरिफों और नए अंतरराष्ट्रीय समझौतों की रूपरेखा बनाने की जिम्मेदारी संभाली। आज वह फिर ट्रंप के खासमखास सलाहकार के रूप में अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छाए हुए हैं, क्योंकि हाल ही में उन्होंने, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ पर रोक लगाने के बाद भी ट्रंप को राष्ट्रपति की अन्य शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वैश्विक टैरिफ को 15 फीसदी तक बढ़ाने और भारत, चीन व ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ नई व्यापारिक नीति शुरू करने का कड़ा रुख अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टैरिफ नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण ही दुनिया भर के आर्थिक विश्लेषक जैमिसन ली ग्रीर को ट्रंप की टैरिफ रणनीति का 'शांत वास्तुकार' कह रहे हैं।
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'मोबाइल होम' में बचपन
जैमिसन ली ग्रीर का जन्म चार मार्च, 1979 को अल्बानी, न्यूयॉर्क में हुआ था, पर उनका पालन-पोषण उत्तरी कैलिफोर्निया की पहाड़ियों में एक अत्यंत साधारण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता, माइकल और शैनन ग्रीर, परिवार चलाने के लिए एक साथ कई नौकरियां करते थे। एक समय उनका परिवार 'मोबाइल होम' (पहियों वाले घर) में रहता था। चार भाई-बहनों में वह चौथे थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पैराडाइज हाई स्कूल, कैलिफोर्निया से 1998 में पूरी की। इसके बाद ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी (बीवाईयू) से उन्होंने 2004 में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने पेरिस के प्रतिष्ठित संस्थानों 'साइंसेज पो' और 'पैंथियन-सोरबोन विश्वविद्यालय' से ग्लोबल बिजनेस लॉ में मास्टर्स, जबकि वर्जीनिया विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ लॉ से कानून की डिग्री (जेडी) हासिल की है। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के 'जज एडवोकेट जनरल' (जेएजी) कोर में अधिकारी के रूप में कार्य किया। इस दौरान वह इराक में भी तैनात रहे, जहां उन्होंने 'चीफ ऑफ मिलिट्री जस्टिस' के रूप में अपनी सेवाएं दीं। सरकार में शामिल होने से पहले वे प्रतिष्ठित लॉ फर्म किंग एंड स्पैल्डिंग और स्कैडेन आर्प्स में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के पार्टनर के रूप में काम कर चुके थे। उन्होंने चीन के खिलाफ व्यापारिक मुकदमों में अमेरिकी स्टील कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने चीन के साथ 'फेज वन' व्यापार समझौते तथा अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'ट्रेड' से नाता
ग्रीर के पूर्वज टेनेसी के एक छोटे-से कस्बे से थे, जिसका नाम संयोगवश ‘ट्रेड’ था। वह मजाक में कहते हैं कि शायद नियति ने पहले ही तय कर लिया था कि वह बड़े होकर दुनिया के 'ट्रेड' (व्यापार) समीकरणों को संभालेंगे। इंटरनेट पर उनका एक एआई अवतार भी मौजूद है, जिसके साथ एक गाना जोड़ा गया है। वह सार्वजनिक सुर्खियों से दूर रहते हैं। उनके सहकर्मियों के अनुसार, ग्रीर बेहद कम बोलते हैं, लेकिन जब भी बोलते हैं, तो उनकी टिप्पणियां चर्चा की दिशा बदल देती हैं।
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एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड
साल 2025 में जब जैमिसन ली ग्रीर को 20वें अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के रूप में चुना गया, तो उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बनाया। साल 2009 के बाद वह पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जो 'मॉर्मन' समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और अमेरिका के इतने बड़े सरकारी पद (कैबिनेट स्तर) तक पहुंचे हैं। 'मॉर्मन' उन लोगों को कहा जाता है, जो 'द चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे सेंट्स' नाम के ईसाई धार्मिक समूह को मानते हैं। ऐसे लोग परिवार को बहुत महत्व देते हैं। शायद यही कारण है कि ग्रीर अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देते हैं, और अपने अधिकतर संबोधनों में परिवार के त्याग का जिक्र करना नहीं भूलते। ग्रीर की पत्नी का नाम मार्लो ग्रीर है और उनके पांच बच्चे नोएल, पर्ल, ईव, जेम्सन और सोनोरा हैं।

पढ़ने-लिखने का शौक
ग्रीर को पढ़ने-लिखने का बेहद शौक है। वह इतिहास, भूगोल, विज्ञान, संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय मामलों और शास्त्रीय साहित्य से जुड़ी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं। विक्टर ह्यूगो का उपन्यास ‘लेस मिजरेबल’ उनका पसंदीदा है। उन्हें अपना खाली वक्त पुस्तकालय में बिताना अच्छा लगता है। इसके अलावा, वह अक्सर मीडिया संस्थानों के लिए भी लेख लिखते रहते हैं। जीवन से जुड़े खास लम्हों को वह पन्नों पर उतारना नहीं भूलते।

टैरिफ हॉक का तमगा
दूसरे ट्रंप प्रशासन के दौरान चीन पर लगाए जाने वाले बड़े टैरिफ की रणनीति बनाने में ग्रीर को प्रमुख माना जाता है। उन्होंने टैरिफ नीति और व्यापार सुरक्षा से जुड़े कानूनों के तकनीकी पहलुओं पर काम किया और यह तर्क भी मजबूत किया कि इन कदमों से अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को अनुचित विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सकता है। इसी वजह से उन्हें अक्सर 'टैरिफ हॉक' (कड़े टैरिफ समर्थक) भी कहा जाता है। वह अटॉर्नी और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट ई लाइटहाइजर को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
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