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आईआईटी-आईआईएम में नहीं थम रहा आत्महत्या का सिलसिला: पांच साल में 70 होनहारों ने गंवाई जान, क्या है इसकी वजह?

Wed, 26 Aug 2026 05:21 AM IST
निर्मल कांत सीमा शर्मा, नई दिल्ली।

सार

आईआईटी में पांच साल में 70 छात्रों की आत्महत्या ने पढ़ाई के दबाव और कैंपस के माहौल पर सवाल खड़े किए हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी और भेदभाव की शिकायतों के बीच क्या संस्थानों में सुधार के दावे नाकाम साबित हो रहे हैं?
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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केंद्र के सुधार के दावों के बावजूद आईआईटी व आईआईएम जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या का मामला नहीं थम रहा है। देशभर के आईआईटी में पांच वर्षों में 70 होनहारों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। वहीं, जुलाई से शुरू नए सत्र में अब तक आईआईटी में तीन व आईआईएम में एक सुसाइड हो चुके हैं। आईआईएससी बंगलूरू में भी 15 दिन में दो छात्रों ने खुदकशी की है, जबकि अन्य शिक्षण संस्थानों के आंकड़े इसमें जुड़ते ही नहीं हैं।
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यह हाल तब है, जब सरकार ने जनवरी में सुसाइड मामलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसने कहा था कि सब ठीक नहीं है। वही, ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप का दावा है कि जनवरी, 2021 और दिसंबर, 2025 के बीच 65 आईआईटी छात्रों ने खुदकुशी की। इनमें 30 तो 2024 व 2025 में हुई।

कैंपस से हॉस्टल तक भेदभाव भी बड़ा कारण
छात्रों में सुसाइड के मामले बढ़ाने में कैंपस से हॉस्टल तक भाषा, जाति और आर्थिक भेदभाव की भी बड़ी भूमिका है। अंग्रेजी माध्यम के छात्र हिंदी समेत क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों को दीन-हीन नजरों से देखते हैं। कई शिक्षक भी ऐसे छात्रों से भेदभाव करते हैं। इससे ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों का आत्मविश्वास कम होता है। इससे वे क्लास में पिछड़ते हैं तो मानसिक तनाव में आकर आखिरकार आत्महत्या कर लेते हैं।
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70% संस्थानों में नहीं हैं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ
70% से अधिक संस्थानों में पूर्णकालिक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक नहीं है। सिर्फ 10% में ही यह सुविधा है। अन्य में जरूरत पर बुलाया जाता है। छात्र भी इस डर से काउंसलर के पास नहीं जाते हैं कि शिक्षक, दोस्त और अभिभावक क्या कहेंगे?
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यह भी दावा...कैंपस में बाहरी महसूस करते हैं छात्र
  • प्रौद्योगिकी संस्थानों में 2.5 लाख युवाओं पर किए गए सर्वे में दावा किया गया है कि कैंपस में 34 फीसदी छात्र खुद को बाहरी महसूस करते हैं।
  • महज 56 फीसदी को प्रशासन पर भरोसा है, जबकि 32% ने माना उनके संस्थान में काउंसलिंग सुविधा नहीं है।
  • 26 फीसदी छात्रों को सुविधाओं के बारे में जानकारी नहीं है, जबकि 15% गंभीर मानसिक तनाव से गुजरे हैं।
  • 9 फीसदी छात्रों ने माना कि परेशानी के बाद उन्हें कभी-न-कभी आत्महत्या करने जैसे विचार आए थे।
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