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एनटीए: परीक्षाओं में सुधार की क्या है तैयारी? नीट भी जल्द होगी कंप्यूटर आधारित, महानिदेशक ने बताया पूरा खाका

Mon, 14 Sep 2026 12:22 PM IST
आकाश कुमार अमर उजाला ब्यूरो

सार

NTA: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी अपनी परीक्षा व्यवस्था को और सुरक्षित व पारदर्शी बनाने की तैयारी में है। महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि नीट भी जल्द कंप्यूटर आधारित हो सकती है। आगे भारत की परीक्षा तकनीक को ब्रिक्स समेत दूसरे देशों तक पहुंचाने की तैयारी है।
 
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NTA Reforms - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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NTA: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) अब देश में अपनी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही इसे दूसरे देशों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान एएनआई से बातचीत में एजेंसी की आगे की योजना साझा की।

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उन्होंने बताया कि फिलहाल एनटीए की प्राथमिकता भारत में अपनी परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है। इसके बाद ऐसी तकनीक और व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जिसे दूसरे देश भी अपना सकें। इसमें ब्रिक्स देशों को भी शामिल किया गया है।

पहले भारत में परीक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर क्यों?

अभिषेक सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा सेवाएं देने से पहले एनटीए अपने देश की व्यवस्था को बेहतर बनाना चाहता है। उनका कहना है कि परीक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें गलती की गुंजाइश कम से कम हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो।

उन्होंने कहा, "अभी हम अपनी परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। सबसे पहले भारत में व्यवस्था और प्रक्रियाओं को बेहतर करना है, ताकि हम बिना किसी गलती के और पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से परीक्षाएं करा सकें। इसके बाद हमारी सोच ऐसी व्यवस्था तैयार करने की है, जिसे दूसरे देश भी अपना सकें और जो एक डिजिटल सार्वजनिक संसाधन की तरह काम कर सके। इसमें ब्रिक्स देश भी शामिल हैं।"

परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कैसे इस्तेमाल होगा?

एनटीए परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और धोखाधड़ी को रोकने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। इसके तहत परीक्षा से जुड़े आंकड़ों, लॉग और विश्लेषण की मदद ली जाएगी।

अभिषेक सिंह ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग धोखाधड़ी रोकने और परीक्षा प्रक्रिया में किसी समस्या का पता लगाने के लिए भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हम अभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल केवल परीक्षा कराने में ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी रोकने में भी किया जाएगा। हम लॉग, आंकड़ों और विश्लेषण को देख रहे हैं, ताकि परीक्षाएं बिना किसी गलती या समस्या के कराई जा सकें।"

आधार और चेहरे की पहचान से कैसे होगी अभ्यर्थियों की जांच?

एनटीए अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित और चेहरे की पहचान वाली व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर परीक्षा देने जैसी गड़बड़ियों को रोकना है।

अभिषेक सिंह के अनुसार, भारत के डिजिटल ढांचे की मदद से अभ्यर्थियों की पहचान की व्यवस्था काफी मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा, "हमारे पास आधार आधारित और चेहरे की पहचान की व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल अभ्यर्थी की पहचान के लिए किया जाता है। आधार के आंकड़ों और चेहरे की पहचान वाली व्यवस्था के साथ हमने इस समस्या का समाधान किया है और लगभग हर परीक्षा में इस व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं।"

एनटीए परीक्षा केंद्रों पर पहचान की पुष्टि के लिए जैविक पहचान और आधार से जुड़ी चेहरे की पहचान वाली तकनीक का व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल कर रहा है।

क्या अब सभी एनटीए परीक्षाएं कंप्यूटर पर होंगी?

एनटीए के महानिदेशक ने साफ किया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा व्यवस्था को भविष्य की प्रमुख व्यवस्था माना जा रहा है। वर्तमान में एनटीए की ज्यादातर प्रमुख परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित तरीके से हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि जेईई, यूजीसी नेट, सीयूईटी और निफ्ट जैसी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित तरीके से आयोजित की जा रही हैं। वहीं नीट अभी कागज और कलम के माध्यम से होती है। एनटीए जल्द ही नीट को भी कंप्यूटर आधारित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अभिषेक सिंह ने कहा, "हमारी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित हैं, सिर्फ नीट परीक्षा को छोड़कर। नीट भी बहुत जल्द कंप्यूटर आधारित व्यवस्था में जाएगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए परीक्षा ढांचे को मजबूत करना और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना जरूरी है। यही भविष्य है। अभी जेईई, यूजीसी नेट, सीयूईटी और निफ्ट की परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित हैं। आने वाले दिनों में हमारी सभी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित होंगी।"

क्या एनटीए दूसरे देशों के लिए भी परीक्षाएं कराएगा?

एनटीए भविष्य में सीमा पार परीक्षा सेवाओं की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है। हालांकि, इसके लिए पहले भारत की मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी माना गया है।

अभिषेक सिंह ने कहा, "सीमा पार परीक्षाएं अगला कदम हैं। अभी हमारा प्रयास अपनी व्यवस्था को बेहतर करना है, ताकि हम भारतीय परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से करा सकें। इनमें किसी तरह की गड़बड़ी या गलती न हो और अपनी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत न पड़े। घरेलू व्यवस्था मजबूत होने के बाद हम दूसरे वैश्विक संगठनों के लिए परीक्षाएं आयोजित करने की दिशा में जाएंगे।"

इससे साफ है कि एनटीए का तत्काल लक्ष्य विदेशों में परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि पहले भारत में अपनी व्यवस्था को मजबूत करना है।

दूसरे देशों से परीक्षा व्यवस्था में क्या सीखा जा सकता है?

एनटीए के महानिदेशक ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी चुनौतियां केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। अलग-अलग देशों में परीक्षा आयोजित करने के अलग तरीके हैं। ऐसे में देश एक-दूसरे के अनुभव और तकनीक साझा कर सकते हैं।

उन्होंने चीन की गाओकाओ परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा, "हर देश इन चुनौतियों का सामना अलग-अलग तरीके से करता है। ऐसा नहीं है कि परीक्षाएं केवल भारत में होती हैं। पूरी दुनिया में परीक्षाएं होती हैं। चीन की गाओकाओ परीक्षा के बारे में काफी सुना गया है कि परीक्षा के दौरान पूरे शहरों में व्यापक स्तर पर व्यवस्था की जाती है। हर परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जरूरत होती है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां हम एक-दूसरे से चर्चा कर सकते हैं, सहयोग कर सकते हैं और अपने अनुभव साझा कर सकते हैं।"

इस तरह एनटीए भविष्य में दूसरे देशों के साथ परीक्षा तकनीक, प्रक्रियाओं और अनुभवों को साझा करने की संभावनाएं भी देख रहा है।
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ब्रिक्स सम्मेलन में क्यों अहम है एनटीए का यह प्रस्ताव?

भारत ने 2026 में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी की। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित सम्मेलन के दौरान एनटीए की ओर से परीक्षा व्यवस्था को दूसरे देशों तक ले जाने की बात सामने आई।

एनटीए का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब ब्रिक्स के स्तर पर देशों के बीच तकनीक और अनुभव साझा करने पर भी जोर है। भारत की योजना पहले घरेलू परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और इसके बाद जरूरत के अनुसार दूसरे देशों या वैश्विक संस्थाओं के लिए परीक्षा सेवाएं उपलब्ध कराने की है।

चीन 2027 में ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सम्मेलन के दौरान 2027 में ब्रिक्स की अगली मेजबानी के लिए चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के तीसरे दशक में प्रवेश के साथ दुनिया को संगठन से ठोस परिणामों की उम्मीद है।
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