बढ़ रही है मांग
फॉरेंसिक साइंस वह विज्ञान है, जो अपराधों की जांच, सबूतों का विश्लेषण और न्यायिक प्रक्रियाओं में सटीक प्रमाण प्रदान करने में मदद करता है। इसका उपयोग क्राइम सीन जांच, डिजिटल अपराध, फिंगरप्रिंट एनालिसिस, डीएनए प्रोफाइलिंग, साइबर फॉरेंसिक और कानूनी मामलों में निर्णय लेने के लिए किया जाता है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, बैंकिंग फ्रॉड, स्वास्थ्य और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में भी इसकी मांग बढ़ रही है।
ऐसे करें शुरुआत
फॉरेंसिक साइंस में कॅरिअर बनाने के लिए बारहवीं कक्षा विज्ञान संकाय (भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा जीवविज्ञान/गणित) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद बीएससी फॉरेंसिक साइंस या संबंधित विषयों में स्नातक तथा एमएससी या विशेष डिप्लोमा करके विशेषज्ञता प्राप्त की जा सकती है। इस क्षेत्र में सफल होने के लिए वैज्ञानिक सोच, तार्किक विश्लेषण, धैर्य, सूक्ष्म निरीक्षण क्षमता और आधुनिक उपकरणों के संचालन का ज्ञान होना चाहिए। साथ ही कंप्यूटर और डिजिटल तकनीकों की समझ भी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाएं
वर्तमान में अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर प्रवेश सीयूईटी-यूजी के माध्यम से दिया जा रहा है। राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) भी अपने कई यूजी कार्यक्रमों में सीयूईटी-यूजी स्कोर के आधार पर प्रवेश देता है, जबकि कुछ पाठ्यक्रमों के लिए अलग पात्रता या प्रवेश प्रक्रिया लागू हो सकती है।