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आंध्र प्रदेश: स्कूली किताबों में हो रहा सुधार, अब पुरुष भी घर के काम करते दिखते हैं, मंत्री ने दी जानकारी

Fri, 25 Sep 2026 01:45 PM IST
आकाश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

Removal Of Gender Stereotypes In School Textbooks:आंध्र प्रदेश में कक्षा 1 और 2 की किताबों में घरेलू कामकाज दिखाने का तरीका बदला गया है। अब पुरुषों और महिलाओं को बराबर घरेलू काम करते दिखाया जा रहा है। मंत्री नारा लोकेश ने इस बदलाव के पीछे का कारण भी बताया है।
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आंध्रप्रदेश की स्कूली किताबों में हो रहा बदलाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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Removal Of Gender Stereotypes In School Textbooks: आंध्र प्रदेश में स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में लैंगिक रूढ़ियों को खत्म करने के लिए बदलाव किए गए हैं। राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने बताया कि इसका उद्देश्य बच्चों में छोटी उम्र से ही महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना है। मंत्री ने गुरुवार को दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित चर्चा में यह जानकारी दी।

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इस दौरान उन्होंने राज्य में स्कूली और उच्च शिक्षा में किए जा रहे बदलावों के बारे में बताया। इनमें मूल्य आधारित शिक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता, तकनीक आधारित पढ़ाई, पाठ्यक्रम में बदलाव और उद्योग से जुड़े कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य यह भी देख रहा है कि अलग-अलग पाठ्यक्रमों, मुख्य विषयों और सहायक विषयों में क्या पढ़ाया जा रहा है, वे कितने प्रासंगिक हैं और पाठ्यक्रम बाजार की जरूरतों के कितने करीब हैं।

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पहले किताबों में घरेलू कामकाज कैसे दिखाया जाता था?

  • मंत्री ने बताया कि कक्षा 1 और 2 की पाठ्यपुस्तकों में पहले घरेलू कामकाज करते हुए केवल महिलाओं को दिखाया जाता था। अब राज्य ने इस तरीके में बदलाव किया है।
  • इस बदलाव के जरिए बच्चों को शुरुआत से ही घरेलू कामकाज को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी के तौर पर देखने से बचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा, "कक्षा 1 और 2 की पाठ्यपुस्तकों में पहले घरेलू कामकाज पूरी तरह महिलाओं द्वारा किए जाने के रूप में दिखाया जाता था। राज्य ने अब इस तरीके को बदल दिया है। अब दिखाए जाने वाले घरेलू कामकाज में 50 प्रतिशत काम पुरुषों और 50 प्रतिशत काम महिलाओं द्वारा किया जाता दिखाया जाता है। इसका उद्देश्य पहली कक्षा से ही लैंगिक रूढ़ियों से बचना है।"

शनिवार को बिना बस्ते के क्या सीखते हैं विद्यार्थी?

  • नारा लोकेश ने बताया कि आंध्र प्रदेश के स्कूलों में शनिवार को ‘बिना बस्ते का दिन’ यानी नौ बैग डे मनाया जाता है।
  • इस दिन बच्चों को मूल्य आधारित और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने वाली गतिविधियां कराई जाती हैं।

उन्होंने कहा, "गतिविधियों में परिवार के बजट और कृषि बजट के प्रबंधन से जुड़े पाठ, क्षेत्रीय भ्रमण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परिचय शामिल हैं। विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों से परिचित कराया जा रहा है, ताकि वे इस तकनीक को समझ सकें और अपने चुने हुए क्षेत्रों में इसका प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।"
 

पाठ्यक्रम में कितनी बार सुधार किया गया है

  • मंत्री ने बताया कि राज्य में पाठ्यक्रम में सुधार के दो दौर पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।
  • उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में बदलाव रातोंरात नहीं हो सकता। इसके लिए धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा।
  • उनके अनुसार, कक्षा के स्तर पर लगातार सुधार किए जाने चाहिए और पाठ्यक्रम में समय-समय पर नई चीजें जोड़ी जानी चाहिए।
     

हर 45 मिनट की कक्षा के बाद क्या होगा?

नारा लोकेश ने तकनीक की मदद से कक्षाओं को अधिक संवादात्मक बनाने की अपनी दीर्घकालिक योजना के बारे में भी बताया। उनके प्रस्ताव के अनुसार,
  • हर 45 मिनट की कक्षा के बाद विद्यार्थियों को उस पाठ का सार बताने वाला 60 या 90 सेकंड का वीडियो दिखाया जाएगा।
  • इसके बाद उनसे चार से पांच सवाल पूछे जाएंगे।
  • क्लिकर तकनीक की मदद से विद्यार्थी इन सवालों के जवाब देंगे।
  • इससे कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने कहा, "उद्देश्य विद्यार्थियों को निष्क्रिय रूप से सीखने वाले से सक्रिय रूप से सीखने वाला बनाना है। सीखने से जुड़ा आंकड़ा राज्य की सीखने की प्रबंधन प्रणाली (एलएमएस) में जाएगा। इससे प्रणाली हर विद्यार्थी की पढ़ाई में मौजूद कमी की पहचान कर सकेगी और उसकी जरूरत के अनुसार गृहकार्य और लक्षित पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध करा सकेगी।"
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कौन सी एप पहचानेगी विद्यार्थी की पढ़ाई की कमजोरी?

मंत्री ने एक विद्यार्थी का उदाहरण देते हुए बताया कि कोई छात्र गणित में अच्छा हो सकता है, लेकिन किसी खास विषय या अवधारणा को समझने में कमजोर हो सकता है। उन्होंने प्रायिकता का उदाहरण दिया:

उन्होंने कहा, "मान लीजिए कोई विद्यार्थी गणित में अच्छा है, लेकिन प्रायिकता जैसे किसी खास विषय में कमजोर है। प्रणाली उस खास कमी की पहचान करेगी और लीप एप के जरिए अतिरिक्त गृहकार्य और पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराएगी। यह एप अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी उपलब्ध है। इससे विद्यार्थी यह स्पष्ट रूप से समझ सकेंगे कि उन्हें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।"

इस व्यवस्था के जरिए विद्यार्थियों की व्यक्तिगत सीखने की जरूरत को पहचानने और उसी के अनुसार उन्हें अतिरिक्त सामग्री देने पर जोर दिया जा रहा है।
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