दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जॉकी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिका खारिज कर दी, जिसमें दिल्ली रेस क्लब को 15 दिनों के अंदर परिसर खाली करने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जॉकी एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिका खारिज कर दी, जिसमें दिल्ली रेस क्लब को 15 दिनों के अंदर परिसर खाली करने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर ने कहा कि जॉकी एसोसिएशन लीज धारक नहीं है और क्लब ने पहले ही अपीलीय अदालत के समक्ष वैधानिक अपील दायर कर रखी है। इसलिए एसोसिएशन की रिट याचिका पोषणीय नहीं है।
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11 अगस्त को एस्टेट ऑफिसर ने पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट, 1971 की धारा 5(1) के तहत आदेश पारित कर क्लब को जमीन खाली करने का निर्देश दिया था। दिल्ली रेस क्लब सेंट्रल गोल्फ लिंक रोड पर प्रधानमंत्री आवास के सामने स्थित एक शताब्दी पुरानी घुड़दौड़ संस्था है। एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि वे बेदखली आदेश से सीधे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले 20 वर्षों से दिल्ली रेस क्लब में रह रहे घोड़ों के कल्याण की मांग कर रहे हैं।
सरकार की ओर से सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसल आशीष दीक्षित ने कहा कि जॉकी एसोसिएशन को रिट याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है और बेदखली आदेश के खिलाफ अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील की जा सकती है। याचिका में कहा गया था कि परिसर पहले से ही पर्याप्त सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है, फिर भी बेदखली का फैसला मनमाना और कानून के विपरीत है। विवाद 1926 के लीज के नवीनीकरण को लेकर 1999 से चल रहा है।