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World Book Fair: अध्यात्म और ध्यान की किताबें आईं पसंद, किड्स एक्सप्रेस में कल्पना-कहानियों की रोचक यात्रा

Sat, 17 Jan 2026 06:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

नई पीढ़ी किताबों से दूर नहीं हुई, उसकी पढ़ने की पसंद बदल गई। अब पाठकों का फोकस पारंपरिक साहित्य से हटकर सेल्फ हेल्प, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, आत्मकथा, जीवनी, भारतीय संस्कृति, इतिहास और पौराणिक विषयों की ओर ज्यादा है।
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पुस्तक मेले में थीम स्टॉल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व पुस्तक मेले में हॉल नंबर-3 के स्टॉल संख्या एम-2 पर सावन कृपाल रूहानी मिशन का स्टॉल विशेष रूप से युवाओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। स्टॉल पर मेडिटेशन, अध्यात्म, ध्यान-अभ्यास के माध्यम से आंतरिक व बाहरी शांति, सदाचारी जीवन, पूर्ण गुरु का महत्व, शाकाहार का महत्व, संतों-महापुरुषों के जीवन चरित्र और बच्चों के लिए प्रेरणादायक पुस्तकों की विस्तृत श्रंखला प्रदर्शित की गई है।

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सावन कृपाल प्रकाशन की प्रकाशित संत राजिंदर सिंह जी महाराज की पुस्तकें पाठकों के बीच खास चर्चा का विषय बनी है। इनमें मन का शुद्धिकरण, मंजिले-महबूब, मेडिटेशन एज मेडिकेशन फॉर द सोल, दिव्य चिंगारी, आत्म शक्ति और ध्यान-अभ्यास, अंतरीय व बाह्य शांति प्रमुख है।  इसके अलावा बच्चों के लिए लिखी गई टेंडर हैंड्स, टेंडर हार्ट्स और द मैथ ऑफ शेयरिंग जैसी पुस्तकें भी अभिभावकों और बच्चों को आकर्षित कर रही हैं। 

संत राजिंदर सिंह जी महाराज एक विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, ध्यान-अभ्यास के शिक्षक और सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख हैं। उन्होंने अपने जीवन को प्रेम, एकता और शांति के संदेश के प्रसार के लिए समर्पित किया है। मिशन के विश्वभर में 3400 से अधिक केंद्र स्थापित हैं और इसका साहित्य 56 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। यह स्टॉल पुस्तक मेले में आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना है।
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युवाओं को आकर्षित कर रहीं नए विषयों की किताबें
नई पीढ़ी किताबों से दूर नहीं हुई, उसकी पढ़ने की पसंद बदल गई। अब पाठकों का फोकस पारंपरिक साहित्य से हटकर सेल्फ हेल्प, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, आत्मकथा, जीवनी, भारतीय संस्कृति, इतिहास और पौराणिक विषयों की ओर ज्यादा है। भारतीय सेना, शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रीय नायकों पर आधारित किताबों की मांग बढ़ी है। सेना के प्रति बढ़ा सम्मान पाठकों को इन विषयों से जोड़ रहा। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं की किताबें बराबर बिक रहीं। 

यूजीसी नेट पर लिखी किताब पर खास चर्चा
पुस्तक मेले में ऑथर्स स्पॉटलाइट कार्यक्रम हुआ। इसमें लेखक डॉ अमित कुमार निरंजन ने अपनी किताब रेडी रेकनर पर युवाओं से चर्चा की। 22 शैक्षणिक डिग्रियां और 9 बार यूजीसी नेट क्वालीफाई कर चुके डॉ अमित कुमार निरंजन ने बताया कि यूजीसी नेट केवल रटने से नहीं, बल्कि सही रणनीति और अध्ययन से आसानी से पास किया जा सकता है। मेले में यूजीसी नेट पेपर-1 पर लिखी उनकी किताब की खासी चर्चा है। उन्होंने कहा कि उनकी किताबें सिलेबस को सरल बनाने और परीक्षा में उपयोगी हैं।

अनोखे स्टाल बने आकर्षण का केंद्र
विश्व पुस्तक मेले में सिर्फ किताबें ही नहीं, अनोखे स्टाल भी लोगों को लुभा रहे। मेला रचनात्मकता, कल्पना और कला का समावेश बना है। कई प्रकाशकों ने साधारण स्टाल की जगह थीम आधारित कॉन्सेप्ट अपनाकर पाठकों को अपनी ओर खींचा है। कहीं, स्टॉल चलती-फिरती लाइब्रेरी के रूप में नजर आ रहा, तो कहीं किताबों की दीवार में झांकती खिड़की लोगों को फोटो खिंचवाने पर मजबूर कर रही।

पीले रंग की ट्रकनुमा संरचना को मोबाइल बुक स्टॉल के रूप में तैयार किया गया है। यहां अकादमिक, फिक्शन, नॉन-फिक्शन और कविता संग्रह को अलग-अलग श्रेणियों में सजाया गया है। नेशन प्रेस प्रकाशन की सजी रोशनी और किताबों की करीने से लगी अलमारियां यह संदेश दे रही हैं कि किताबें कहीं भी, कभी भी पाठकों तक पहुंच सकती हैं।

विदेशी रंग में सजी किताबों की दुनिया : फ्रांस दूतावास और इंस्टीट्यू फ्रांसिस का स्टॉल द फ्यूचर ऑफ बुक दर्शकों के बीच चर्चा में है। बांस की संरचना से तैयार स्टाल फ्रेंच साहित्य, संस्कृति और भाषा को आधुनिक रूप में प्रस्तुत कर रहा। रंगीन रोशनी और ओपन डिजाइन युवाओं को न सिर्फ किताबों, बल्कि विदेशी भाषा और साहित्य की ओर भी आकर्षित कर रहा। अनोखे बुक स्टॉल को लोग कैमरे में कैद कर रहे।

उपन्यास की दीवार बनी सेल्फी पॉइंट
चर्चित हिंदी उपन्यास दीवार में एक खिड़की रहती थी से प्रेरित स्टॉल मेले में आकर्षण बना है। दीवार के पीछे एक युवक जाता और इस अनोखी खिड़की से झांकता। इधर उनके मित्र इस दृश्य को कैमरे में कैद करते है। युवाओं का अंग्रेजी नॉवेल, कविता और नॉन-फिक्शन की ओर रुझान है।

नोशन प्रेस में उभरते लेखकों को मिला नया मंच
प्रगति मैदान किताबों की महफिल से गुलजार है। विश्व पुस्तक मेला में जहां बड़े-बड़े प्रकाशक अपनी चमक बिखेर रहे हैं, वहीं एशिया का प्रमुख सेल्फ-पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म नोशन प्रेस रचनात्मकता की नई लहर लेकर आया है। हॉल 5 में नोशन प्रेस के स्टॉल पर किताबों का खजाना फैला है। प्रिंट और ईबुक फॉर्मेट में 1,20,000 से ज्यादा किताबें प्रकाशित करने वाला यह प्लेटफॉर्म उभरते लेखकों को सपनों के पंख दे रहा है। नोशन प्रेस के सीईओ और सह-संस्थापक नवीन वलसा कुमार ने बताया कि हर इंसान के दिल में ऐसी कहानियां छिपी होती हैं जो दुनिया बदल सकती हैं। हमारा मिशन है प्रकाशन को सबके लिए आसान बनाना। यहां हम डीआईवाई टूल्स के जरिये लेखकों को गाइड कर रहे हैं, ताकि वे अपनी रचनाओं को वैश्विक स्तर पर पहुंचा सकें। वलसा कुमार की बातों से साफ है कि नोशन प्रेस सिर्फ किताबें नहीं बेच रहा, बल्कि एक क्रांति ला रहा है।

हर पाठक नेता नहीं, पर हर नेता पाठक जरूर है: नौसेना प्रमुख
विश्व पुस्तक मेले में पाठकों की भारी भीड़ देखकर भारतीय नौसेना प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि आज की किंडल पीढ़ी भी किताबों की ओर लौट रही है, जो बेहद उत्साहजनक है। उन्होंने कहा कि हर पाठक नेता नहीं होता, लेकिन हर नेता जरूर पाठक होता है। एडमिरल त्रिपाठी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) और शिक्षा मंत्रालय की सराहना करते हुए कहा कि किताबें नेतृत्व और जीवन दोनों में मार्गदर्शन देती हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नियमित पढ़ने से कठिन परिस्थितियों का सामना आसान हो जाता है। उन्होंने लोगों को रोज पढ़ने की आदत डालने की सलाह दी और कहा कि सोने से पहले दो पन्ने पढ़ना भी व्यक्ति को बेहतर और समझदार बनाता है।

मेले के सातवें दिन भी भारत मंडपम के हॉल 2 से 6 तक भारी भीड़ देखने को मिली। हर उम्र के लोग किताबें खरीदते नजर आए। शुक्रवार को मेले में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह और पंजाब के पूर्व राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित भी उपस्थित रहे। इस दौरान थीम पवेलियन में फोर्ज्ड बाय द सी: द इंडियन नेवी स्टोरी पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक कमांडर कलेश मोहनन, लेफ्टिनेंट कमांडर अनुपमा थपलियाल और लेफ्टिनेंट जीवितेश सहारण द्वारा लिखी गई है।

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बाल मंडप की किड्स एक्सप्रेस में कल्पना और कहानियों की मनोरंजक यात्रा  

बाल मंडप की किड्स एक्सप्रेस में प्रवेश करते ही बच्चे रोमांचित होने लगते हैं। इसका आकार और डिजाइन उन्हें सचमुच ट्रेन के अंदर होने जैसी खुशी देता है। 10-18 जनवरी तक भारत मंंडपम के हॉल नंबर 6 में बना बाल मंडप बच्चों को विशेष तौर पर आकर्षित कर रहा है। जहां वे कई तरह की रचनात्मक गतिविधियों का निशुल्क लाभ ले रहे हैं।  

रेल यात्रा की संकल्पना पर आधारित किड्स एक्सप्रेस एक ऐसा सजीव और रोचक संसार है, जहां हर दिन हजारों बच्चे कल्पना, रचनात्मकता और नई चीजों की खोज की यात्रा में शामिल होते हैं। इसका आकर्षक बैंगनी रंग और एनिमेटेड खिड़कियाँ और टिकट चेकर, चायवाला, संगीतकार तथा किताब में मगन बच्चे जैसे मनमोहक चित्र बरबस ही ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। इसका प्रवेश द्वार इंजन के आकार का है, जो भाप की तरह बुलबुले छोड़ता हुआ, नन्हें बच्चों का स्वागत करता है। एनबीटी-इंडिया के सेल्फी पॉइंट विद्या और ज्ञान उन्हें इस यात्रा पर आमंत्रित करते हैं।

इस ट्रेन के अंदर के डिब्बे भी उतने ही आकर्षक हैं जितना प्रवेश द्वार। हर कोच पढ़ने, सोचने, रचने और महसूस करने की प्रेरणा देने के लिए सोच-समझकर डिजाइन किया गया है। यात्रा की शुरुआत ‘स्टोरीटाइम शताब्दी’ से होती है। यह एक रीडिंग कॉर्नर है, जिसके पार्श्व में अंतरिक्ष थीम की दीवार पर लिखा है रीड बियॉन्ड द स्टार्स। रॉकेट के आकार की किताबों की अलमारियाँ कहानियों से भरी हैं, जो नन्हे पाठकों को नए-नए संसारों की ओर उड़ान भरने का न्यौता देती हैं।  

'रेल म्यूज़ियम' में भाप इंजन और आधुनिक वंदे भारत के मॉडल की रेल गाड़ी भी प्रदर्शित हैं। एक लघु फोटो प्रदर्शनी भारतीय रेल के विकास की कहानी बयान करती है। वहीं इंटरएक्टिव स्क्रीन बच्चों को क्विज़, पहेलियों और सुडोकू के लिए अवसर देती है। यहां  विजेताओं को पुस्तक कूपन से पुरस्कृत किया जाता है।

'रीडर्स क्लब मूवमेंट' कोच बच्चों को एनबीटी के रीडर्स क्लब बुलेटिन और पाठक मंच बुलेटिन से परिचित कराता है, जिनमें देशभर के युवा पाठकों द्वारा रचित कविताएँ, लेख और कलाकृतियाँ शामिल हैं। ये कम उम्र से पढ़ने और लिखने की आदत को प्रोत्साहित करती हैं।

रेलवे पुस्तक स्टॉल से प्रेरित 'किताब घर' एक रचनात्मक दुनिया का ठिकाना है, जहाँ हैंगिंग शीट्स पर कहानियाँ और कविताएँ लिखी गईं हैं। बच्चे अधूरी कहानियाँ पूरी करते हैं, कविताएँ लिखते हैं और पुस्तक आवरण डिजाइन करते हैं। अपनी कल्पना को अभिव्यक्ति में ढालते वाली यह एक शानदार रचनात्मक दुनिया है। पास ही 'इमोजी मी' बच्चों को रंगों और कला के माध्यम से भावनाओं को समझने में मदद करता है।

'क्लिक-मी जंक्शन' अंडर द वॉटर थीम पर आधारित फोटो कॉर्नर विशेष तौर पर आकर्षित कर रहा है, जहाँ परिवार यादगार पल कैद करते हैं। अन्य डिब्बों में मधुबनी और वर्ली कला, कागज की कठपुतली, क्ले आर्ट तथा आर्ट एंड क्राफ्ट की कार्यशालाएँ आयोजित होती हैं। बच्चे इनमें पूरे उत्साह से शामिल हो रहे हैं। सबसे लोकप्रिय पड़ाव है 'कलर मी' जहां रंग दो दुनिया सारी पंक्ति के साथ एक विशाल डूडल कैनवास बच्चों को रंग, हँसी और मुक्त अभिव्यक्ति से भर देता है। 

हर रोज हो रहे हैं कहानियां, रचनात्मकता और वैश्विक स्वर के कार्यक्रम  
संगीत, नाटक, कठपुतली और रोल-प्ले के माध्यम से कहानी सत्रों से लेकर एसडीजी लक्ष्यों से जुड़ी गतिविधियों तक, यह पवेलियन रोचक अंदाज में सीखने के लिए एक भरपूर माहौल प्रदान करता है। स्पेन, रूस, फ़िनलैंड और इज़राइल से आए अंतरराष्ट्रीय स्टोरीटेलर और लेखक इन्हें वैश्विक रंग दे रहे हैं। जहां बच्चे कहानियों के ज़रिए विभिन्न संस्कृतियों की सैर करते हैं। यहां आयोजित कहानी एवं विविध सत्रों में लॉरा एस्कुएला, अनीता सिन्हा, राजीव तांबे, जानकी सबेश, आइरिस अर्गमन, ईरिस माटा, इरिना क्राएवा, शरण्या श्रीराम, नामिक शेरपा, रामेंदर कुमार ने भी सहभागिता की।

रचनात्मकता की यह यात्रा ओरिगामी, कार्टून डिजाइन, कार्टून डिजाइन, थिएटर वर्कशॉप, कठपुतली शो और मन को शांत करने वाली मंडला आर्ट सत्रों के साथ आगे बढ़ती है। 'मैथ्स मैजिक', 'वैदिक गणित के साथ फन' और 'विज्ञान का जादू' से गणित और विज्ञान को रोचक तरीके से समझा जा रहा है। जबकि बाल लेखक संवाद, मॉस्कॉट से मुलाकात और बच्चों की फिल्म स्क्रीनिंग इसमें कुछ और अनुभव जोड़ देते हैं।  

शाम के समय 'ट्रेनिंग द ट्रेनर्स' कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षक, शिक्षाविद और अभिभावक एकत्र होते हैं, जहाँ खिलौना-आधारित शिक्षण, नाटक-आधारित लर्निंग, खेल के माध्यम से गणित, कक्षा में मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मक शिक्षण उपकरणों पर कार्यशालाएँ, समूह चर्चाएँ और लाइब्रेरियंस मीट आयोजित की जाती हैं।

कुल मिलाकर, किड्स एक्सप्रेस एक रोचक वाइब्रेंट संसार है, जहां किताबें केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं, कहानियाँ सिर्फ़ सुनाई नहीं जातीं, बल्कि कल्पना में रची जाती हैं और सीखना खेल के आनंद में घुला होता है। यह एक ऐसी यात्रा है, जिससे हर बच्चा जिज्ञासा, आत्मविश्वास और विस्मय, कुछ न कुछ अद्भुत और अनोखा साथ लेकर लौटता है।
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