बाद में कोर्ट के आदेश पर महिला को इहबास अस्पताल में भेज दिया गया। वहां महिला ने समय पूर्व एक बच्ची को जन्म भी दिया, लेकिन बच्ची की जान नहीं बच पाई। पुलिस लगातार उसके परिवार की तलाश में जुटी रही। करीब 37 दिन बाद पुलिस की मेहनत रंग लाई और आखिर उसके परिवार को ढूंढ ही लिया गया।
मानसिक अस्वस्थ महिला ने अपने परिवार को पहचान लिया और बेहद खुश हुई। महिला के मिलने के बाद परिवार भी पुलिस का धन्यवाद करते नहीं थक रहे। शाहदरा जिला पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने महिला के परिवार को तलाश करने वाली टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। महिला का परिवार मिलने के बाद पुलिसकर्मी भी बेहद खुश हैं।
पुलिस उपायुक्त प्रशांत गौतम ने बताया कि एक सितंबर को करीब 21 साल की गर्भवती महिला सीमापुरी पुलिस को मिली। महिला बुरी तरह रोकर अपने परिवार को याद कर रही थी। महिला एसआई अनुपम ने उससे पूछताछ की तो महिला ने अपने पति व जिले नाम टीकमगढ़, मध्य प्रदेश बताया, इसके अलावा वह कुछ नहीं बता पा रही थी। उसकी मानसिक स्थित बहुत ठीक नहीं थी।
टीम ने फौरन उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उसकी जांच और इलाज हुआ। तबीयत में सुधार होने के बाद महिला को 4 सितंबर को कोर्ठ में पेश किया तो अदालत ने उसे इहबास अस्पताल भेजने के अलावा वहां निदेशक को उसके इलाज की विस्तृत रिपोर्ट अदालत को देने के लिए कहा। 7 सितंबर को महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया।
चूंकि छह माह में ही बच्ची ने जन्म लिया था, इसलिए उसकी जान नहीं बच सकी। अब पुलिस को उसके परिवार की तलाश करना था। हवलदार अंकुश और सिपाही राज देशवाल को टीकमगढ़, मध्य प्रदेश भेजा गया, लेकिन उसके परिवार का कुछ पता नहीं चल सका। टीम वापस लौट आई। इस बार महिला ने बाघेश्वर धाम में परिवार के रहने की बात बताई।
पुलिस ने कई समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया, कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच दोबारा हवलदार अंकुश व सिपाही राम देशवाल को बाघेश्वर धाम भेजा गया। वहां कुछ लोगों ने महिला को पहचान लिया। बाद में उसके परिवार को दिल्ली लाकर सात अक्तूबर को परिवार से मिलवा दिया गया। औपचारिताएं पूरी करने के बाद महिला को परिवार के हवाले कर दिया गया।