ग्रेटर नोएडा में एलपीजी सिलिंडर की कमी से काम प्रभावित हुआ है, जिससे श्रमिकों का पलायन बढ़ गया। लेबर चौक पर मजदूरों की संख्या घट गई है और काम मिलने में दिक्कत हो रही है, जिससे स्थानीय कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी अब श्रमिकों के पलायन के रूप में सामने आ रही है। ग्रेटर नोएडा के डेल्टा सेक्टर की रोटरी लगने वाले लेबर अड्डा पर जहां श्रमिकों का जमावड़ा घट गया है। वहीं, काम भी नहीं मिलने का खतरा अब मडराने लगा है। सबसे अधिक पलायन उत्तराखंड और देखने को मिला है।
विज्ञापन
यहां बुधवार को एक श्रमिक ने बताया कि उनके कई साथी जोकि उत्तराखंड और बिहार के रहने वाले हैं, वह वापस चले गए हैं। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, वे वापस नहीं आएंगे। लेबर अड्डा पर काम की तलाश में आने वाले श्रमिकों की संख्या में भी उन्होंने करीब एक तिहाई की कमी बताई। इसके पीछे की वजह से काम मिलने में दिक्कत है। ऐसा क्यों हो रहा है, के जबाव में श्रमिकों ने बताया कि फैक्ट्रियों में कॉमर्शियल या संस्थानों में सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में वहां काम भी सीमित हो गया है।
बिहार चले गए हिमेश से एक श्रमिक ने अपने फोन से बात कराई। उसने बताया कि कुछ बचत न हो तो इतनी दूर काम करने के लिए रहने का क्या फायदा। जो सिलिंडर पहले 900 रुपये तक में मिल जाता था। उसके लिए ब्लैक में 3000 रुपये तक ले रहे हैं। अब सिलिंडर पर ही खर्च कर देंगे तो घर कैसे चलाएंगे? जब सब ठीक हो जाएगा, तभी वापस आएंगे।
विज्ञापन
पलायन की वजह से अब लेबर चौक पर पहले जैसी भीड़ नहीं दिखाई दे रही है। जहां पहले सुबह-सुबह बड़ी संख्या में मजदूर काम के इंतजार में खड़े रहते थे, वहीं अब सन्नाटा पसरा हुआ है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें छोटे-बड़े काम करवाने के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी हो रही प्रभावित
राम प्रकाश ने बताया कि सिलिंडर महंगे दामों में मिल रहे हैं और इससे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। महंगाई का सीधा असर हमारी बचत पर पड़ रहा है। जयवीर ने बताया कि महंगे सिलिंडर से बचत पूरी तरह खत्म हो गई है। इससे आर्थिक स्थिति भी बिगड़ रही है। पूरे परिवार पर इसका असर पड़ता है। घर जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। वहीं रमेश का कहना है कि सिलिंडर खाली हो जाने पर नहीं करा पाते हैं। एजेंसी तक सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। इस समय तीन से चार हजार रुपये में सिलिंडर मिल रहा है। रामू ने बताया कि चूल्हे और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उनका समय और मेहनत बढ़ रही है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सिलिंडर बहुत महंगा मिल रहा है।