फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: दास्तान...सेक्टर-150 में अव्यवस्थाओं, परेशानियों और परेशानियों की

विज्ञापन
विज्ञापन
यहां रह रहे लोगों को बिजली-पानी और सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल रहीं
विज्ञापन

05 से ज्यादा परिवार रह रहे

13 ग्रुप हाउसिंग के नक्शे प्राधिकरण ने पास किए थे

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। सेक्टर-150 हादसे के बाद सोसाइटियों के निवासी रविवार को मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरे और अपना गुस्सा जाहिर किया। यह सेक्टर नोएडा प्राधिकरण की बहुचर्चित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का हिस्सा है। इसे विकसित करने के लिए प्राधिकरण ने लोटस ग्रीन को 2010 में 13 लाख 29 हजार वर्ग मीटर जमीन आवंटित की थी। यहां खेल सुविधाएं तो विकसित नहीं हुईं लेकिन इसके कई टुकड़े जरूरी हो गए। और 13 ग्रुप हाउसिंग के नक्शे भी प्राधिकरण से पास हो गए। सोसाइटी बनाकर बिल्डरों ने फ्लैट बेच दिए। फिलहाल यहां 5 हजार परिवार रह रहे हैं लेकिन बिजली-पानी और सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।



सड़कें उखड़ीं

सेक्टर की कई सोसाइटियों के आसपास की सड़कें उखड़ी हैं। निवासी इसकी शिकायत हमेशा करते रहते हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण से दो टूक जवाब दे दिया जाता है कि आंतरिक सड़कें हैं। इन्हें बिल्डर बनवाएगा। बिल्डर निवासियों की परेशानी से वास्ता नहीं रख रहे।
विज्ञापन




सीवर लाइन अधूरी

सेक्टर में सीवर लाइन भी अधूरी है। कई सोसाइटियों से बिल्डर तो सीधे नाले में सीवर का पानी बहा रहे हैं। एसटीपी पूरी तरह से नहीं चलाया जा रहा है। इसको लेकर जल विभाग और पर्यावरण सेल भी निरीक्षण नहीं कर रहे न ही बिल्डर पर कार्रवाई की जा रही है। गंदा पानी जहां-तहां भर रहता है।



नहीं है स्ट्रीट लाइट

टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी अमन निजावन ने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरा सेक्टर विकास से कटा हुआ है। कई सड़कों पर तो स्ट्रीट लाइटें ही नहीं लगी हैं। ऐसे में शाम होने के बाद अंधेरा छा जाता है।



मोबाइल नेटवर्क भी ठीक नहीं

सेक्टर-150 को स्पोर्ट्स सिटी का सेक्टर बताकर लगातार जिम्मेदार अधिकारी दूरी बनाते रहे। यहां पर मोबाइल नेटवर्क तक सही से नहीं आता है। इसको लेकर भी प्राधिकरण की तरफ से कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
विज्ञापन




खाली जगह के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं

प्राधिकरण ने जो जमीन यहां पर स्पोर्ट्स सिटी के लिए आवंटित की है उस पर बिल्डर कब तक निर्माण करवाएंगे ये अभी तय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई में अलग-अलग प्रकरण चल रहे हैं। प्राधिकरण भी इस खाली पड़ी जमीन के लिए कोई योजना नहीं बना पाया है। न ही विकास न करवाने को लेकर कोई कार्रवाई की गई है। सेक्टर में खाली पड़े प्लॉट में झाड़ियां नजर आती हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें