उप जिला अस्पताल में बीते छह दिनों से अल्ट्रासाउंड जांच सेवा ठप पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट 10 दिन तक अवकाश पर हैं। गर्भवती और मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में गर्भवतियों के लिए जांच निशुल्क है लेकिन निजी केंद्रों में उन्हें जांच के लिए 1200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
पछवादून के साथ जौनसार बावर क्षेत्र से रोजाना औसतन 60 गर्भवती चिकित्सक की सलाह पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए उप जिला अस्पताल आती हैं। एक दिन में 30 ही गर्भवतियों की अल्ट्रासाउंड जांच हो पाती है। शेष 30 गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए अगले दिन का समय दिया जाता है।
बीती 22 सितंबर को रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर चले गए थे। वह दो अक्तूबर तक अवकाश पर रहेंगे। रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण गर्भवतियों को जांच के लिए निजी केंद्रों में जाना पड़ रहा है। जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवतियों के लिए अल्ट्रासाउंड जांच निशुल्क है, लेकिन जांच सेवा ठप होने के कारण उन्हें सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के लिए रेडियोलॉजिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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वर्जन
रेडियोलॉजिस्ट की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए मुख्यालय मांग भेजी गई है। तीन अक्तूबर से अल्ट्रासाउंड जांच सेवा बहाल हो जाएगी। - डॉ. प्रदीप चौहान, सीएमएस