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Noida News: कम सवारियां पड़ीं भारी, 40 से ज्यादा परिचालकों की ड्यूटी पर लगी रोक

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- अफसर और कर्मचारियों के बीच मतभेद होने से संचालन और बिगड़ा
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- 300-300 चालक और परिचालक हैं मोरना डिपो पर, मनमाने ढंग से कटौती का लगाया आरोप

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। रोडवेज से बसें तो वैसे ही खाली दौड़ रही थीं अब अफसर और कर्मचारियों के बीच मतभेद होने से संचालन और बिगड़ गया है। राजस्व की निर्धारित दर पूरी न कर पाने की वजह निगम ने 40 से ज्यादा परिचालकों को काम पर नहीं भेजा। इससे न सिर्फ स्टाफ में नाराजगी बढ़ गई है बल्कि बसों का संचालन भी इससे प्रभावित हो रहा है। कई रूटों पर बसें नियमित नहीं पहुंच रही हैं जिसके कारण यात्री इंतजार करते रह गए।
मोरना बस डिपो पर 300 चालक और 300 परिचालक तैनात हैं। जिनमें अधिकतर संविदाकर्मी हैं। संविदाकर्मियों को प्रति किमी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। जिसके आधार पर उनकी तनख्वाह भी बनती हैं। परिवहन निगम के नियम के अनुसार प्रतिमाह लोड फैक्टर 50 प्रतिशत से कम होने पर उनके वेतन मेंं कटौती कर दी जाती है। डिपो के कुछ परिचालक बीते कुछ समय में लोड फैक्टर पूरा नहीं कर सके। जिसके कारण उनके वेतन में कटौती कर दी गई। आरोप है कि लोड फैक्टर पूरा न कर पाने की वजह से चालीस से ज्यादा परिचालकों को ड्यूटी से हटा दिया। इस संबंध में पत्र लिखकर नाराजगी भी जाहिर की गई। परिचालकों ने अधिकारियों से भी इसका विरोध जताया है। साथ ही रूट पर जाने से भी इन्कार किया है।
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मनमाने ढंग से वेतन कटौती का लगाया आरोप : रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद उप्र के नोएडा डिपो के शाखा मंत्री पंकज शर्मा ने इस संबंध में एआरएम को भी पत्र लिखा। उन्होंने बताया कम राजस्व लाने वाले परिचालकों के वेतन से 100 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक की कटौती की जा रही है। जबकि मुख्यालय के निर्देशानुसार महीने के अंत में 50 प्रतिशत से कम लोड फैक्टर आने पर परिचालक और चालक के वेतन से 2350 रुपये की कटौती करने का प्रावधान है। आरोप है कि कर्मचारियों को ड्यूटी पर जाने से भी रोका जा रहा है।
188 बसों को होता है मोरना डिपो से संचालन :
मोरना डिपो से 188 सार्वजनिक बसों का संचालन किया जाता है। सीएनजी होने की वजह से डिपो की बसें लंबे रूट पर नहीं भेजी जातीं। यहां की सबसे लंबी दूरी की बस लखनऊ तक जाती है। इसके अलावा मेरठ, हरिद्वार, बरेली, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद समेत कई रूटों पर संचालन किया जाता है। यहां से एक भी एसी बसें संचालित नहीं होती। जिन रूटों पर यहां की बसें जाती हैं उन रूटों पर निजी बस समेत कई विकल्प मौजूद हैं। जो कि कम समय में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचा रही हैं। इन कारणों से भी राजस्व में कमी होती है।
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जो परिचालक निर्धारित राजस्व प्राप्त नहीं करते हैं उनकी ड्यूटी बदली जाती है। ताकि निगम को निर्धारित दर का राजस्व प्राप्त होता रहे। इसी के माध्यम से बसोंं का संचालन होता है।

-रोहिताश कुमार, एआरएम मोरना बस डिपो।







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