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Israel-US Iran War: भारतीय छात्र तेहरान और उर्मिया में फंसे, चिंता में अभिभावक पर अपनी सरकार पर भरोसा

Wed, 04 Mar 2026 12:46 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जामिया नगर निवासी कमर अब्बास ने बताया कि उनके बेटे सलमान रजा (28) ईरान के कोम शहर में पढ़ाई करने के लिए गए हैं। वह शहर में 2019 से पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार को जब इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर बमबारी की तो वह परेशान हो गए।
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ईरान संकट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे जंगी माहौल ने भारतीय परिवार की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावक सोशल मीडिया, अखबार और टीवी के माध्यम से ईरान के मौजूदा हालात के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। लगातार ईरान पर हो रही बमबारी देखकर परेशान हो रहे हैं। बच्चों से हर घड़ी फोन के माध्यम से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनसे संपर्क होने पर उन्हें हौसला दे रहे हैं। बच्चों के लिए सलामती की दुआ कर रहे हैं। ऐसी जंगी माहौल में भी अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपनी सरकार पर भरोसा है कि देश की सरकार उनके बच्चों को सकुशल वतन वापस ले आएंगे।

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जामिया नगर निवासी कमर अब्बास ने बताया कि उनके बेटे सलमान रजा (28) ईरान के कोम शहर में पढ़ाई करने के लिए गए हैं। वह शहर में 2019 से पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार को जब इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर बमबारी की तो वह परेशान हो गए। उन्होंने सलमान से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बेटे से संपर्क नहीं हो पाया। बाद में, जब बेटे से संपर्क हुआ, तो सलमान ने उन्हें बताया कि यहां चारों ओर बमबारी हो रही है। लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। इंटरनेट का कनेक्शन रुक-रुक चलता है। प्रशासन की ओर से सभी को होस्टल के अंदर ही रहने के लिए कहा गया है।

मौलाना कमर हुसैन ने बताया कि वह परिवार के साथ ओखला विहार इलाके में रहते हैं। करीब छह वर्ष पहले बेटा मुर्तुजा (25) ईरान के कोम शहर में इस्लामिक पढ़ाई करने गया है। जंग के बीच उन्होंने कई बार बेटे से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संचार व्यवस्था ठीक नहीं होने पर शनिवार को बेटे से संपर्क नहीं हो पाया। मंगलवार को जब सलमान से संपर्क हुआ, तो उन्होंने पिता कमर हुसैन को बताया कि फिक्र करने कोई बात नहीं है। ईरान के लोग उनकी मदद कर रहे हैं। ऐसे मुश्किल हालात में भी उनके दोस्त उनके साथ खड़े हुए हैं।
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त्रिलोकपुरी निवासी हुस्ना खान को बेटी मरियम की फिक्र खाए जा रही है। उनकी बेटी 12वीं कक्षा पास करने के बाद ईरान के उर्मिया शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने के गई है। मरियम की याद में उनकी आंखें नम हो जाती है। बेटी से संपर्क होता है, तो वह बेटी से हिम्मत रखने के लिए कहती है। उन्हें यकीन है कि देश की सरकार उनकी बेटी को सुरक्षित वतन वापस ले आएगी।
डॉक्टर अली ने बताया कि वह मूल रूप से नाला सोपारा, मुंबई के रहने वाले हैं। उनके बेटे मोहम्मद आसिफ अली डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर ईरान के शहर तेहरान गए हैं। बेटे को रमजान पर घर आने के लिए कहा था, लेकिन द्वितीय वर्ष की परीक्षा होने की वजह से वह नहीं आ सके। युद्ध की जब से खबर सुनी तब से पूरे परिवार को आसिफ की फिक्र होने लगी। युद्ध के 24 घंटे बीत जाने के बाद जब अली का बेटे से संपर्क हुआ, तो उसने राहत भरी सांस ली। अली ने बताया कि बेटे से बात करने के बाद उसने ईरान दूतावास को मेल भी किया है। वहीं, उसने भारतीय दूतावास से भी बेटे के वतन वापसी को लेकर मदद की गुहार लगाई हैं। उन्हें यकीन हैं कि देश की सरकार उनके लाल को सकुशल देश ले आएंगे।
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