मदद लेने से भी किया इनकार
सोसायटी निवासी तेजश चतुर्वेदी बताते हैं कि उनका अशोक राणा और उनके परिवार से करीब चार साल पुराना परिचय है। अशोक राणा जब भी मिलते हैं, हमेशा गर्मजोशी से बात करते हैं। उन्होंने कभी अपने चेहरे पर संघर्ष का दर्द जाहिर नहीं होने दिया। बेटे हरीश के लिए जो किया, वह हर किसी के बस की बात नहीं है। सोसायटी के लोगों ने उनकी मदद के लिए आगे आने की कोशिश भी की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से किसी की आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया। तेजश कहते हैं कि उनके हौसले को देखकर हम सभी हैरान रह जाते हैं।
सैंडविच देकर कहते, बिटिया को दे देना
सोसायटी निवासी अनिल चौहान कहते हैं कि अशोक राणा और उनका परिवार हौसले की मिसाल है। वह अक्सर उनसे मिलते हैं और हरीश के बारे में बात करते हुए भी उनकी हिम्मत दिखाई देती है। अनिल बताते हैं कि अशोक राणा बहुत अच्छा खाना बनाते हैं। कई बार मिलते समय वह सैंडविच देकर कहते हैं कि इसे बिटिया को दे देना। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद पूरी सोसायटी उनके साथ खड़ी है और हर कदम पर उनका साथ देगी।