पुलिस अधिकारियों के अनुसार श्रावण मास की कांवड़ यात्रा, छठ पूजा, दुर्गा पूजा समेत विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में जल दुर्घटनाओं, अवैध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों की आशंका बढ़ जाती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिले में रणनीतिक स्थानों पर जल पुलिस चौकियों की स्थापना प्रस्तावित की गई है। योजना के तहत नोएडा जोन में थाना सेक्टर-126 क्षेत्र के अंतर्गत ओखला बैराज की पूर्व दिशा में कालिंदी कुंज यमुना पुल के नीचे एक जल पुलिस चौकी स्थापित की जाएगी। सेंट्रल नोएडा जोन में थाना इकोटेक-3 क्षेत्र के कुलेसरा इलाके में हिंडन नदी के किनारे चौकी प्रस्तावित है। वहीं ग्रेटर नोएडा जोन में चार जल पुलिस चौकियां बनाई जाएंगी। जिनमें थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र के गांव कामबक्शपुर यमुना तटीय क्षेत्र, थाना दादरी क्षेत्र की कोट नहर, थाना दनकौर क्षेत्र की खेरली नहर पुलिया और थाना रबूपुरा क्षेत्र के ग्राम चंडीगढ़ यमुना नहर शामिल हैं।
आपात स्थिति में त्वरित बचाव कार्य होगा करना
जल पुलिस चौकियों का मुख्य दायित्व घाटों पर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग, नावों की निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालन सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित बचाव कार्य करना होगा। इसके लिए स्थानीय नाविकों, गोताखोरों और आपदा मित्रों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक जल पुलिस चौकी को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा। यहां प्रशिक्षित पुलिस बल के साथ रबरयुक्त रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित बोट चालक, सहायक चालक, स्थानीय गोताखोर और आपदा मित्र तैनात रहेंगे। प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार जनशक्ति में बढ़ोतरी भी की जा सकेगी।
जल चौकी होती तो नहीं जाती युवराज की जान
जिले में अगर जल चौकी होती तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी। अभी पुलिस ने प्रशिक्षित तैराक नहीं है। इस कारण पुलिस गांव में रहने वाले निजी गोताखोरों की मदद लेनी होती है। वहीं एसडीआरएफ, एनडीआरएफ का दफ्तर नहीं होने के कारण भी परेशानी होती है। बड़ी दुर्घटना के दौरान गाजियाबाद से संबंधित बचाव दल के कर्मियों को आने में समय लगता है। सर्दी, कोहरा, बारिश के अलावा जाम में फंसने के कारण राहत और बचाव कार्य में देरी होती है। जिस दिन युवराज के साथ घटना घटित हुई हुई उस दिन काफी कोहरा होने के कारण भी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को आने में देरी हुई थी। वहीं जिले में जल चौकी भी नहीं थी। जिससे रबरयुक्त रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित बोट चालक, सहायक चालक, स्थानीय गोताखोर और आपदा मित्र को साथ लेकर युवराज को समय रहते बचाया जाता।