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उपराज्यपाल और सीएम में बढ़ेगी तल्खी!: एलजी कार्यालय ने लौटाईं शिक्षा विभाग और वक्फ बोर्ड की 47 फाइलें

Sat, 27 Aug 2022 06:10 PM IST
प्रशांत कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में एलजी और मुख्यमंत्री के बीच तल्खी और बढ़ने की संभावना है। एलजी कार्यालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बजाय सीएमओ कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाली 47 फाइलें लौटा दी हैं।
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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उपराज्यपाल के खत लिखकर याद दिलाने के बावजूद दिल्ली सरकार से राजनिवास को भेजी गई 47 फाइलों पर मुख्यमंत्री के दस्तखत नहीं थे। इससे नाराज उपराज्यपाल ने सभी फाइलों को वापस दिल्ली सरकार को भेज दिया। इनमें विवादों में फंसे शिक्षा विभाग और वक्फ बोर्ड से संबंधित फाइलें शामिल हैं। सभी फाइलों पर मुख्यमंत्री कार्यालय कर्मचारियों के दस्तखत थे।

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राजनिवास सूत्रों ने कहा है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार बिना किसी जवाबदेही के काम कर रही है। 1993-2013 के बीच राजनिवास को भेजी जाने वाली फाइलों पर सभी मुख्यमंत्रियों के दस्तखत होते थे, लेकिन इस चलन को मौजूदा सरकार ने छोड़ दिया है। जबकि ऐसी फाइलें प्रशासन और शासन से संबंधित होने के साथ ही कई संवेदनशील मामलों से जुड़ी होती थीं। 

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री की कोशिश जाहिरा तौर पर विवाद की स्थिति में अपने लिए बहाना तलाशने की है। वह खुद अपनी बेगुनाही का सबूत देते हैं, जबकि उनके मंत्री व अधिकारी फंस जाते है। इसके ताजा उदाहरण स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया हैं। इससे पहले उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 22 अगस्त को पत्र लिखकर याद दिलाया था कि उनके विचार/अनुमोदन के लिए बिना हस्ताक्षर वाली फाइल नहीं भेजी जाए।

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इसके माध्यम से उपराज्यपाल ने कहा था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उनके अनुमोदन के लिए या मेरी राय के लिए संविधान के अनुच्छेद 239एए (4) के तहत संयुक्त सचिव द्वारा बड़ी संख्या में प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं। यह तभी संभव है जब मंत्री दौरे पर हो या अस्वस्थ्य हो। इस स्थिति में स्वीकृति आवश्यक हो तो टेलीफोन पर लिया जाएगा। मंत्री के निर्णय को उनके निजी सचिव द्वारा लिखित में सूचित किया जाएगा।

उपराज्यपाल ने अपने पत्र में जिक्र किया था कि प्रभावी शासन के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय यह सुनिश्चित करें कि उनकी राय या अनुमोदन के लिए भेजी गई हर फाइल विधिवत हस्ताक्षरित होना चाहिए। साथ ही सुझाव भी दिया कि जल्द से जल्द ई-ऑफिस प्रणाली शुरू करने पर विचार मुख्यमंत्री कार्यालय करें। ताकि फाइलों की निर्बाध आवाजाही संभव हो सके। ई-ऑफिस प्रणालीए अधिकांश सरकारी कार्यालयों में प्रभावी है।
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