एनसीआर में नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 386 दर्ज किया गया, यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। वहीं, ग्रेटर नोएडा में 373 और गुरुग्राम में 286 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 204 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है।
निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 16.54 फीसदी रही। इसके अलावा पेरिफेरल उद्योग से 8.66, आवासीय इलाकों से 4.14 और निर्माण गतिविधियों से 2.28 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शुक्रवार को हवा पूर्वी दिशा से 05 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 950 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 2500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर एक बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 326.5 और पीएम2.5 की मात्रा 186.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि रविवार को हवा गंभीर श्रेणी में पहुंचने और सोमवार को एक बार फिर से बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, कई इलाकों में गंभीर और बेहद खराब श्रेणी में हवा दर्ज की गई।
वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सीएक्यूएम ने गठित की विशेषज्ञ समिति
दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बना हुआ है, जो पीएम2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (एनओएक्स), कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) और वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (वीओसी) के उत्सर्जन को बढ़ाता है। इससे क्षेत्र में जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति प्रमुख शैक्षणिक विशेषज्ञों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों और अन्य क्षेत्रीय विशेषज्ञों को एकजुट करती है, जो वाहन क्षेत्र में उत्सर्जन कम करने के लिए मजबूत और बहुआयामी रोडमैप की सिफारिश करेगी।