फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली: 'ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो, पिछले चुनाव भी रद्द हों', अरविंद केजरीवाल ने की ये मांग

Wed, 23 Sep 2026 01:15 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अरविंद केजरीवाल ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए चुनाव रद्द किए जाएं और दोबारा कराए जाएं।
Register For Event
विज्ञापन
अरविंद केजरीवाल - फोटो : x/aap
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनाव रद्द करके दोबारा कराए जाने चाहिए। केजरीवाल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अकेले ही चुनाव आयोग को चला रहे हैं।

विज्ञापन


अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त) को गिरफ्तार किया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए। पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनाव रद्द करके दोबारा कराए जाने चाहिए। दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुए चुनाव रद्द किए जाएं और दोबारा कराए जाएं।'

केजरीवाल ने कहा, 'चुनाव आयोग किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है। इसमें तीन सदस्य होते हैं... एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त। तीनों बैठकों में हिस्सा लेते हैं, जहां फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाते हैं। तीनों में से किसी को भी अकेले फैसला लेने का अधिकार नहीं है। कोई भी एक व्यक्ति चुनाव आयोग को नहीं चला सकता और न ही इसके अधिकारियों को आदेश दे सकता है। तीनों बराबर होते हैं।' केजरीवाल ने दावा किया कि कई-कई महीनों तक चुनाव आयोग की मीटिंग नहीं हो रही हैं। आदेश पर आदेश दिए जा रहे हैं।
विज्ञापन


विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद वाले विपक्ष के आरोपों के बीच आयोग की ओर से सफाई सामने आई है। आयोग से जुड़े सूत्रों ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच किसी औपचारिक असहमति की बात को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि कामकाज के दौरान अधिकारी अपनी राय और सुझाव रखते हैं, लेकिन इसे आपसी टकराव या औपचारिक असहमति नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के मुताबिक एसआईआर समेत उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर लेते हैं।


चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?
विवाद इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद बढ़ा, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। ये मामले नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े दूसरे फैसलों से संबंधित बताए गए। इसके बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर सवाल उठाए। 

एसआईआर को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी। इसके बाद यह प्रक्रिया देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंची। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों के मसौदे से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के कारण एसआईआर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया। इसी बीच आयोग के दो सदस्यों की ओर से अलग-अलग मुद्दों पर टिप्पणियां किए जाने की बात सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या आयोग के भीतर भी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राय थी। आयोग अब इसी बात को खारिज कर रहा है कि ये टिप्पणियां औपचारिक असहमति थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें