उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन उत्तराखंड के दो दिन के दौरे पर आज उत्तराखंड पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सीएम धामी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह देहरादून के लिए रवाना हुए।
उपराष्ट्रपति ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के परिवीक्षाधीनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी विकसित भारत @2047 के लिए देश के वनों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
उन्होंने भारतीय वन सेवा के योगदान को राष्ट्र की पारिस्थितिक सुरक्षा और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उपराष्ट्रपति ने जोर दिया कि विकास और संरक्षण विरोधी ताकतें नहीं हैं, बल्कि हमेशा साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण, विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका के बीच इष्टतम संतुलन खोजने का आग्रह किया। उन्होंने व्यक्तिगत के बजाय टीम उत्कृष्टता का आह्वान करते हुए सामूहिक प्रयासों और पारंपरिक ज्ञान के सम्मान पर जोर दिया। उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी को 'गैर-परक्राम्य' बताया। उन्होंने अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, एआई और डेटा-संचालित प्रणालियों को क्षेत्रीय अनुभव से जोड़ने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को प्रोत्साहित करने वाला परिवर्तन बताया, जिसमें वर्तमान बैच में लगभग 17 फीसदी महिलाएं हैं।
उन्होंने अधिकारियों से अपने कॅरिअर को वनों को बहाल करने, वन्यजीवों की रक्षा करने और समुदायों का विश्वास जीतने से मापने का आग्रह किया। उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को हमेशा सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
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