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उत्तराखंड: राज्यसभा सीट पर चेहरा बदल भी सकती है भाजपा, वैश्य समाज से ही हो सकता है चेहरा, रिपीट की परंपरा नहीं

Wed, 23 Sep 2026 11:49 AM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनावी हलचल शुरू हो गई है। भाजपा के सामने अब नए चेहरे के चयन के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती भी है
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राज्यसभा सांसद नरेश बंसल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव का बिगुल बज चुका है। भाजपा के लिए राज्यसभा सांसद चुनने की राह आसान है। यहां भाजपा चेहरा बदल भी सकती है लेकिन ये तो साफ माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के नाते वैश्य समाज से ही कोई राज्यसभा पहुंचे। इसमें कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चाओं में हैं।

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होने जा रहा है। वह संघ, भाजपा के वरिष्ठ नेता है। राष्ट्रीय व राज्य संगठन में अहम पदों पर रहे हैं। उनकी सीट खाली होने के साथ ही अब सवाल उठ रहा है कि भाजपा का नया चेहरा कौन होगा। इतिहास देखें तो भाजपा उत्तराखंड में हमेशा नए चेहरों और सामाजिक, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए हर बार नए प्रत्याशी को ही मौका देती रही है। कोई चेहरा रिपीट नहीं किया गया। लिहाजा, सबकी नजरें इस बात पर हैं कि परंपरा टूटेगी या कायम रहेगी।उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में वैश्य समाज शहरी प्रभाव के कारण निर्णायक है।

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देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी की करीब 15-20 विधानसभा सीटों पर इनकी पांच से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी करीबी मुकाबलों में स्विंग फैक्टर साबित होती है। पारंपरिक तौर पर यह समाज भाजपा का मजबूत कोर वोटर माना जाता रहा है। लिहाजा, ये माना जा रहा है कि भाजपा को जो भी चेहरा अब राज्यसभा जाएगा, वह वैश्य समाज का ही प्रतिनिधि ही होगा। इसमें वर्तमान सांसद के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है।

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भाजपा से कौन कब रहा राज्यसभा सांसद

सुषमा स्वराज(2000–2006) : राज्य गठन के समय आवंटित सीट पर रहीं, बाद में मध्य प्रदेश से राज्यसभा गईं।

मनोहर कांत ध्यानी (1996–2002) : उत्तराखंड बनने के बाद का बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया, दोबारा मौका नहीं मिला।

भगत सिंह कोश्यारी (2008–2014) : कार्यकाल पूरा होने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े और नैनीताल से सांसद बने।

तरुण विजय (2010–2016) : छह साल का कार्यकाल पूरा किया, दोबारा रिपीट नहीं किए गए।

अनिल बलूनी (2018–2024) : राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने पर 2024 में पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे।

नरेश बंसल (2020–2026): 2020 में निर्वाचित हुए। 25 नवंबर को कार्यकाल पूरा होगा।

डॉ. कल्पना सैनी (2022 से वर्तमान): 2022 में उच्च सदन पहुंचीं।

महेंद्र भट्ट (2024 से वर्तमान): 2024 में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे।

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25 को कोर कमेटी की बैठक तय करेगी पैनल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि 25 सितंबर को कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। जो भी कार्यकर्ता राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी दावेदारी करेंगे, उनमें से चुनकर तीन नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। इसी आधार पर केंद्रीय नेतृत्व प्रत्याशी की घोषणा करेगा। उन्होंने बताया कि चेहरा बदलेगा या नहीं, ये पैनल से चुने जाने वाले नामों से ही स्पष्ट होगा।

 

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