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उत्तराखंड: कैमरे चूके, सर्वर अटका, बिजली ने भी दिया झटका, बाहरी वाहनों से ग्रीन सेस वसूली का सिस्टम बेहाल

Wed, 07 Oct 2026 01:54 PM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूली की व्यवस्था तकनीकी दिक्कतों में उलझ गई है। 37 स्थानों पर लगे कैमरों और सर्वर की खामियों के चलते हर वाहन सिस्टम की पकड़ में नहीं आ पा रहा है। फरवरी से अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का ग्रीन सेस जमा हुआ है।
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देहरादून - फोटो : माई सिटी रिपोर्टर
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विस्तार
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प्रदेश की सड़कों पर बाहरी राज्यों के वाहनों की बढ़ती आवाजाही से सरकार को करोड़ों रुपये का ग्रीन सेस मिलना है, लेकिन वसूली का सिस्टम ही जवाब दे रहा है। कहीं कैमरों की नजर चूक रही है तो कहीं सर्वर में जगह की कमी से नंबर प्लेट की तस्वीरें प्रोसेस नहीं हो पा रहीं। बिजली गुल होने पर व्यवस्था ठप हो जाती है। नतीजा, फरवरी से सितंबर तक संभावित राजस्व के मुकाबले महज 20 करोड़ रुपये ही ग्रीन सेस के रूप में जमा हो सके हैं।

परिवहन विभाग ने फरवरी में बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने की व्यवस्था लागू की थी। इसके लिए प्रदेश की 37 जगहों पर एनपीआर कैमरे लगाए गए हैं। राज्य की सीमा में प्रवेश करते ही कैमरा वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर लेता है। तस्वीर प्रोसेस होने के बाद वाहन के फास्टैग या उससे जुड़े बैंक खाते से निर्धारित राशि काटी जाती है।

दो दिन तक ही रहता है फोटो डेटा

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व्यवस्था में सबसे बड़ी दिक्कत फोटो डेटा के स्टोरेज को लेकर है। सर्वर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण फिलहाल केवल दो दिन तक का डेटा रखा जा रहा है। इससे सभी वाहनों की तस्वीरों को समय पर प्रोसेस करने में परेशानी आ रही है। आईटीडीए स्तर पर प्रयास के बाद परिवहन विभाग ने अपना डेटा सेंटर बनाने की योजना बनाई, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक संस्था के माध्यम से डेटा को क्लाउड पर ले जाने की तैयारी है। इसके अलावा कई स्थानों पर एक ही कैमरा कवरेज में वाहनों की तस्वीर लेता है।

इसके दायरे से बाहर से गुजरने वाले वाहनों की फोटो नहीं मिल पाती। ऐसे स्थानों पर कैमरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर भी कैमरे काम नहीं कर पाते। अभी तक फरवरी से सितंबर तक करीब 20 करोड़ रुपये ही ग्रीन सेस के रूप में जमा हो सके हैं। पूरी क्षमता से व्यवस्था संचालित होने पर राजस्व इससे कई गुना अधिक हो सकता था। इस संबंध में उप परिवहन आयुक्त शैलेष तिवारी ने बताया कि सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। बिजली जाने पर कैमरे संचालित हो इसकी व्यवस्था की जा रही है

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35 हजार कैंची धाम, 27 हजार आशारोड़ी में पहुंचे

राज्य में सार्वजनिक अवकाश और पर्यटन सीजन में संख्या वहनों की संख्या कई गुना तक बढ़ जाती है। दो अक्तूबर की बात करें तो कैंची धाम में 35 हजार वाहन पहुंचे थे, जबकि आशारोड़ी में 20 हजार से अधिक वाहन रिपोर्ट हुए। इसी दिन मसूरी रोड पर कुठाल गेट पर ही सुबह 9:15 से 11.15 तक 1500 वाहन पहुंचे थे। नारसन बार्डर पर 20245 वाहन रिपोर्ट हुए थे। इसमें बड़ी संख्या में अन्य राज्यों के भी वाहन थे।कैमरों से वाहनों के नंबर प्लेट की खींची गई फोटो को प्रॉसेस से जुड़ी तकनीकी दिक्कत आ रही है, इसे दूर करने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा जिन जगहों पर कैमरों की संख्या और आसपास से वाहनों के निकाले जाने की संभावना रहती हे, वहां पर एनपीआर कैमरों की संख्या को बढ़ाया जाएगा।  -सनत कुमार सिंह, अपर परिवहन आयुक्त

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