फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिर पर आई 'आपदा' तो उत्तराखंड सरकार को आया होश

Tue, 24 Jun 2014 05:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
मानसून के सर पर आ जाने के बाद अब उत्तराखंड सरकार को एक बार फिर से याद आया है कि प्रदेश को सेटेलाइट फोन की जरूरत पड़ेगी।
विज्ञापन


हालांकि राज्य पहले से ही केंद्र से सेटेलाइट फोन की मांग करता रहा है पर केंद्र पर दबाव बनाने की जहमत शायद ही उठाई गई हो। इसी का परिणाम रहा है कि जून 2013 में भी आपदा के कुछ समय बाद ही प्रदेश को सेटेलाइट फोन मिल पाए।

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदलने और प्री मानसून का असर दिखना शुरू हो गया है। मानसून जून के अंतिम सप्ताह में प्रदेश में धमक सकता है।
Trending Videos

मानसून से डरे हुए हैं लोग

हालांकि इस बार मानसून कमजोर बताया जा रहा है पर फिर भी लोग डरे हुए हैं।

यही कारण है कि आपदा की तैयारी से लेकर पुनर्निर्माण तक के मामलों में सरकार को कोर्ट में घसीटने से परहेज नहीं किया जा रहा है।

इतना होने पर मानसून की तैयारी सरकार के स्तर पर रस्म अदायगी वाली ही दिखाई दे रही है। हाल यह है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री से सौ सेटेलाइट फोन की मांग की है।

यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जबकि प्रदेश के पर्वतीय हिस्से बरसात से जूझ रहे हैं। मानसून के लिए कुछ दिन का समय बचा हुआ है।

आपदा के बाद मिले थे 72 सेटेलाइट फोन

जून 2013 की आपदा के बाद प्रदेश को 72 सेटेलाइट फोन भी मिले थे। राहत और बचाव के बाद ये सेटेलाइट फोन वापस कर दिए गए थे।

इस समय प्रदेश में केवल 14 सेटेलाइट फोन हैं। 13 जिलों में हैं और एक आपदा प्रबंधन केंद्र में रखा हुआ है।

हाल यह है कि प्रदेश की एसडीआरएफ केपास तक सेटेलाइट फोन नही है। हालत इसलिए भी ज्यादा खराब हो रहे हैं कि जून 2013 की आपदा के बाद अभी तक प्रदेश का संचार तंत्र पटरी पर नहीं आ पाया है।

पर्वतीय जिलों खासकर घाटियों में शैडो जोन हैं और यहां सिर्फ सेटेलाइट फोन से ही संपर्क हो पाता है।
विज्ञापन

राज्य की जिम्मेदारी अधिक

विशेषज्ञों की माने तो आपदा प्रबंधन तंत्र को अपडेट रखने में राज्य की जिम्मेदारी अधिक है।

आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के मुताबिक यह राज्य का विषय है। केंद्र की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथारिटी जरूर राज्यों की तैयारी पर निगाह रखती है।

पर यह निगाह रखना भी राज्य से मिले प्रस्तावों को आगे बढ़ाना और राज्य को योजना में मदद करने तक सीमित है। ऐसे में बहुत हद तक आपदा प्रबंधन में राज्य अपने ऊपर ही निर्भर है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें