संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेट करना जरूरी
एम्स ऋषिकेश के इंटरनल मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार बताते हैं कि संक्रमण की चपेट में आने वाले व्यक्ति और उसके संपर्क में आने वाले लोगों को आइसोलेट करना जरूरी है। इससे संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकेगा। स्वाइन फ्लू के लक्षणों को गंभीरता से लेना होगा। सांस लेने में दिक्कत, अचानक बुखार, ठंड लगना, खांसी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण सामने आने पर बिना किसी देरी के चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
इंफ्लुएंजा एच1एन1 वायरस से निपटने के लिए अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग प्रत्येक स्तर पर इससे निपटने के लिए तैयार है।
- विनय शंकर पांडेय, स्वास्थ्य सचिव, उत्तराखंड
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है। यह इंफ्लुएंजा ए वायरस के एच1एन1 सबटाइप से फैलता है। इसे स्वाइन फ्लू कहने के पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि 2009 में फैली महामारी के दौरान सामने आए ए (एच1एन1) पीडीएम09 वायरस को स्वाइन फ्लू कहा गया था। इसे मौसमी इंफ्लुएंजा भी कहा जाता है।
यदि लक्षण सामने आएं तो यह करें
1. हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
2. मास्क पहनें।
3. छींकते और खांसते समय मुंह और नाक को ढकें।
4. आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।