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देहरादून: एमबीबीएस प्रमाणपत्र फर्जीवाड़ा: जांच का दायरा बढ़ा तो पुराने दाखिलों पर भी उठेंगे सवाल

Fri, 25 Sep 2026 05:01 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

फर्जी प्रमाणपत्रों से एमबीबीएस में दाखिले का मामला अब नए सत्र से आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
जांच व्यापक हुई तो पुराने दाखिलों के साथ मेडिकल के अलावा दूसरे कोर्स में हुए प्रवेश भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
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एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले का मामला अब केवल मौजूदा सत्र तक सीमित रहने के बजाय व्यापक जांच की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसा हुआ तो संदेह इसी सत्र के दाखिलों पर नहीं बल्कि पिछले सत्रों के दाखिलों पर भी जाता दिख रहा है। देहरादून पुलिस की एसआईटी प्रमाणपत्र तैयार होने से लेकर उनके सत्यापन और दाखिले में इस्तेमाल होने तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।

प्रारंभिक जांच में चार छात्राओं समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है और संबंधित दाखिले निरस्त किए गए हैं। जांच में ऐसे प्रमाणपत्र सामने आए हैं, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित होने का दावा किया गया था। एसआईटी सरकारी अभिलेखों, प्रमाणपत्र जारी करने वाली प्रक्रिया और राजस्व स्तर पर हुए सत्यापन की भी जांच कर रही है। मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि जांच का दायरा केवल हाल में सामने आए प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं है। सरकार ने आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। करीब 350 अभ्यर्थियों के दस्तावेज के सत्यापन की मांग भी सामने आई है।

हालांकि, सूची में शामिल सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी होने का दावा नहीं किया गया है। ऐसे में जांच यदि पिछले वर्षों के दाखिलों तक पहुंचती है तो पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं। इससे पहले के सत्रों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के तहत हुए दाखिलों की पात्रता पर भी सवाल उठ सकते हैं। जांच में किसी पुराने प्रमाणपत्र के फर्जी पाए जाने पर संबंधित दाखिले की वैधता भी जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार हुए और उनका सत्यापन कैसे हुआ। बिचौलिया पकड़ा गया तो वह कई लोगों के नाम भी खोल सकता है।

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डेढ़ साल पहले उत्तरकाशी में तो नहीं हुआ खेल

अब पकड़े गए आरोपी धीरज श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया है कि वह डेढ़ साल पहले उत्तरकाशी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में गया था। श्रीवास्तव का काम ही यही है कि वह कमीशन और फर्जीवाड़े के आधार पर कम मेरिट वालों का दाखिला कराता है। ऐसे में अगर वह उत्तरकाशी के इस मेडिकल कॉलेज में गया था तो इस बात की भी आशंका है कि उसने वहां भी कोई न कोई इस तरह का खेल किया होगा। अब मौजूदा जांच पूरी हुई और फिर आगे बढ़ी तो क्या मामला उत्तरकाशी तक भी पहुंचेगा यह देखने वाली बात होगी।

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