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उत्तराखंड: होटल में फ्री डिनर खिलाकर थमाई 1.40 लाख की फर्जी हॉलिडे स्कीम, उपभोक्ता आयोग ने सिखाया कंपनी को सबक

Wed, 21 Jan 2026 01:53 PM IST
रेनू सकलानी अवनीश चौधरी, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

होटल में फ्री डिनर खिलाकर 1.40 लाख की फर्जी हॉलिडे स्कीम थमा दी गई। मामले में देहरादून उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को सबक सिखाया। 1.40  लाख वापस करने के अलावा 25 हजार रूपये मानसिक प्रताड़ना और मुकदमा खर्च देने का फैसला सुनाया।
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Dinner - फोटो : Freepik
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विस्तार
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आम लोगों को जगह जगह मुफ्त डिनर का लालच देकर सस्ते हॉलिडे पैकेज के नाम पर लाखों रूपये ऐंठने वाली एक कंपनी अब खुद कानूनी शिकंजे में आई है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह धोखाधड़ी का शिकार हुए एक ग्राहक को उसके 1.40 लाख रुपये ब्याज सहित वापस लौटाए। 

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साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए पांच हजार रुपये अलग से भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी की ओर ग्राहकों पर थोपी गई पैसा वापस न करने की शर्त को भी अवैध करार दिया है। इन्हीं शर्तों की वजह से तमाम लोग ऐसी कंपनियों के जाल में फंस जाते हैं।

फ्री डिनर के बहाने बुलाकर जाल में फंसाया
देहरादून निवासी जितेंद्र कुमार को जनवरी 2022 में कंपनी ने एक होटल में फ्री डिनर पर आमंत्रित किया था। वहां कंपनी के सेल्स प्रतिनिधियों ने उन्हें बातों में उलझाकर 10 साल की एक हॉलिडे मेंबरशिप स्कीम बेची। जितेंद्र को मौखिक तौर पर भरोसा दिलाया गया कि इस स्कीम में कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, पीक सीजन में भी होटल मिलेगा और खाने-पीने पर 30 फीसदी की भारी छूट मिलेगी।

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...लेकिन हस्ताक्षर करवाते ही बदल गईं शर्तें
भरोसे में आकर जितेंद्र कुमार ने अपने क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। भुगतान के तुरंत बाद उनसे एक छपे हुए एग्रीमेंट पर बिना पढ़ने का समय दिए बिना हस्ताक्षर करा लिए गए। जब उन्होंने घर जाकर उसे पढ़ा, तो पता चला कि मौखिक वादों और लिखित शर्तों में जमीन-आसमान का अंतर है। 
एग्रीमेंट में हर साल 9,500 रुपये का एक्स्ट्रा मेंटेनेंस चार्ज अनिवार्य था और खाने पर छूट जैसी कोई बात नहीं थी।

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कंपनी की मनमानी पर आयोग की कड़ी फटकार
जब ग्राहक ने उसी रात पैसे वापस मांगे, तो कंपनी ने नो-रिफंड पॉलिसी का हवाला देकर इनकार कर दिया। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां अध्यक्ष पुष्पेन्द्र खरे और सदस्य अल्का नेगी की पीठ ने पाया कि कंपनी ने भ्रामक जानकारी देकर हस्ताक्षर कराए थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसी अनुचित शर्तें कानूनन वैध नहीं हैं जो ग्राहक के हितों के खिलाफ हों।
कंपनी को 45 दिनों के भीतर 1.40 लाख रुपये वापस करने और मुआवजा व मुकदमा खर्च देने का आदेश है। इस राशि पर मुकदमा दाखिल करने के समय (नवंबर 2023) से भुगतान की तिथि तक छह फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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