अत्याधुनिक सेंसर से होगी झील और आसपास के क्षेत्र की निगरानी
वसुंधरा ताल में स्थापित प्रणाली के अंतर्गत ऑल-इन-वन मौसम सेंसर लगाया गया है, जो हवा की गति एवं दिशा, वर्षा, सौर विकिरण, वायु तापमान और वायुदाब से संबंधित आंकड़े मापेगा। इसमें वाटर लेवल सेंसर और हिमस्खलन से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए एक्सेलेरोमीटर एवं टिल्ट सेंसर स्थापित किया है। इसके अतिरिक्त स्नो डेप्थ सेंसर और झील की गहराई के तापमान के लिए सात और सतह के तापमान की निगरानी के लिए एक सेंसर लगाया है।
हर दो घंटे में डैशबोर्ड पर पहुंचेगा डाटा
प्रणाली के अंतर्गत स्थापित सेंसर सामान्य परिस्थितियों में प्रत्येक दो घंटे में आंकड़े सीबीआरआई रुड़की और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में स्थापित डैशबोर्ड पर भेजेगा। किसी भी आपातकालीन स्थिति में निर्धारित दो घंटे के अंतराल की प्रतीक्षा किए बिना सेंसर तत्काल आंकड़े भेज सकेंगे, जिससे संभावित असामान्य परिस्थितियों की समय रहते पहचान करने में सहायता मिलेगी।
आपदा प्रबंधन व्यवस्था को बना रहे अधिक प्रभावी : सीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना के प्रथम चरण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना उत्तराखंड में ग्लेशियल झीलों की निगरानी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य की आपदा पूर्व तैयारी को तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।