देहरादून। एक आश्रय गृह में रहने वाली नाबालिग से दुष्कर्म और उसके गर्भवती होने के मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी सर्वेश को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 70 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। एक आरोपी अनिल को बरी कर दिया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (पॉक्सो) मंजू सिंह मुंडे की अदालत में शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में एक महिला आरोपी को पुलिस को सूचना न देने का दोषी पाते हुए 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
घटना दो जून 2022 की है और शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने सात फरवरी 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि 21 मार्च 2023 को आरोप तय किए गए। मामले में साक्ष्य की कार्रवाई 15 मई 2023 से शुरू हुई और अदालत ने 14 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। अभियोजन के अनुसार एक आश्रय गृह में रहने वाली किशोरी ने वहां की काउंसलर को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद आश्रय गृह की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। जांच में किशोरी की उम्र घटना के समय नाबालिग पाई गई। रिकॉर्ड में उसके जन्म संबंधी स्कूल दस्तावेज और अन्य अभिलेखों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।
गर्भवती होने के बाद सामने आया सच
अदालत के समक्ष पेश चिकित्सा साक्ष्यों के मुताबिक किशोरी जांच के दौरान गर्भवती पाई गई थी। मेडिकल परीक्षण में गर्भ की पुष्टि हुई और बाद में उसने अस्पताल में एक मृत बच्चे को जन्म दिया। अदालत के रिकॉर्ड में मृत नवजात और संबंधित आरोपियों के डीएनए नमूने लिए जाने का भी उल्लेख है।
पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर
अदालत ने पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकer दिलाए जाने का भी आदेश दिया है। फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के सचिव को भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राज्य सरकार की प्रस्तावित योजना के तहत पीड़िता को प्रतिकर की राशि दिलाने की कार्रवाई तत्काल की जा सके। मामले में दोषसिद्ध आरोपियों को फैसले के खिलाफ अपील का अधिकार भी दिया गया है। अदालत ने सजा के वारंट तैयार कर दोषियों को जेल भेजने के निर्देश दिए हैं।